गन्ना भवन बना संघर्ष का मैदान

मेरठ के गन्ना भवन में किसानों का धरना आठवें दिन भी जारी रहा। महापंचायत में राकेश टिकैत ने गन्ना नीतियों के खिलाफ सरकार को चेतावनी देते हुए आंदोलन को लखनऊ तक ले जाने का ऐलान किया।

गन्ना भवन बना संघर्ष का मैदान
HIGHLIGHTS:

➡️ मेरठ के गन्ना भवन में किसानों का धरना आठवें दिन भी जारी
➡️ कड़ाके की ठंड में भी डटे रहे गन्ना किसान
➡️ राकेश टिकैत की महापंचायत से सरकार को चेतावनी
➡️ गन्ना नीतियों और शुगर मिलों के खिलाफ हुंकार
➡️ आंदोलन को लखनऊ तक ले जाने का ऐलान
➡️ अफसर धरने में बैठे, समाधान अब भी दूर

हशमे आलम/ जन माध्यम
मेरठ। जब फसल खेतों में खड़ी हो और किसान सड़कों पर बैठने को मजबूर हो जाए, तो समझिए कि व्यवस्था कहीं न कहीं चूक गई है। कुछ ऐसा ही मंजर रविवार, 21 दिसंबर 2025, को मेरठ के गन्ना भवन (पांडव नगर) पर देखने को मिला, जहां भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेतृत्व में किसानों का धरना लगातार आठवें दिन भी पूरी ताकत के साथ जारी रहा। ठंड हड्डियां कंपा रही है, लेकिन किसानों के इरादे अब भी गर्म हैं।

14 दिसंबर से शुरू हुआ यह धरना अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। धरना स्थल पर तंबू, अलाव और सामूहिक भोजन की व्यवस्था है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसान—बुजुर्ग, युवा और महिलाएं—रात-दिन यहीं डटे हुए हैं। रविवार को आयोजित महापंचायत में हजारों किसानों की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि यह आवाज अब दबने वाली नहीं है।

महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के पहुंचते ही माहौल पूरी तरह बदल गया। टिकैत ने बीन बजाकर अफसरों की “नींद तोड़ने” का प्रतीकात्मक संदेश दिया और सरकार को दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “जमीन किसान की है, फसल किसान की है, तो दाम तय करने का हक भी किसान का है। अगर हमारी बात नहीं सुनी गई, तो आंदोलन मेरठ से लखनऊ तक जाएगा।”

किसानों की नाराजगी का केंद्र गन्ना विभाग, शुगर मिलें और मौजूदा सरकारी नीतियां हैं। किसानों का कहना है कि गन्ना परिवहन का भाड़ा बढ़ता जा रहा है, जबकि भुगतान (हाड़ा) घट रहा है। शुगर मिलों द्वारा गन्ने के रिजेक्शन से किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। इसके अलावा SIR (शुगर इंडस्ट्री रेगुलेशन) नीति को भी किसान अपने लिए घातक बता रहे हैं। पुराने ट्रकों पर लगी रोक, गन्ना बकाया भुगतान, कमीशनखोरी, पारदर्शी तौल, MSP की गारंटी और कर्ज माफी जैसी मांगें भी आंदोलन की धुरी बनी हुई हैं।

राकेश टिकैत ने महापंचायत में कई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि रात दो-दो बजे बुजुर्ग किसानों का गन्ना तौल केंद्रों पर रिजेक्ट किया जा रहा है, जो सीधे-सीधे अन्याय है। उन्होंने चेताया कि अगर सरकार ने समय रहते फैसला नहीं लिया, तो इसका राजनीतिक नुकसान भी उसे ही उठाना पड़ेगा।

धरने की गंभीरता को देखते हुए मेरठ के डीएम और एसएसपी भी धरना स्थल पर पहुंचे। किसानों ने अफसरों को प्रतीकात्मक रूप से धरने में बैठाया और सीधी बातचीत की, लेकिन अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। प्रशासन ने शांति व्यवस्था के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया है। अब तक कोई हिंसक घटना नहीं हुई, लेकिन माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना हुआ है।

सोशल मीडिया पर भी इस आंदोलन की गूंज साफ सुनाई दे रही है। #KisanAndolan और #MeerutNews जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। टिकैत के भाषण और किसानों की भारी भीड़ के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।

शाम तक धरना जारी रहा और किसान नेताओं ने ऐलान किया कि 22 दिसंबर को प्रदर्शन और तेज किया जाएगा। किसानों का साफ कहना है—
मांगें मानी गईं तो धरना खत्म,
नहीं तो यह आग मेरठ से निकलकर लखनऊ तक पहुंचेगी।