सीएचसी शीशगढ़ का बड़ा खुलासा: नोडल अफसर अमित कुमार ने क्लीनिक सील किया, फिर खुलने दिया? हाईकोर्ट में फंसा मामला

बरेली के रेशमा क्लीनिक कांड में नोडल अफसर अमित कुमार गंभीर आरोपों में घिरे। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल, सीलिंग कार्रवाई पर सवाल।

सीएचसी शीशगढ़ का बड़ा खुलासा: नोडल अफसर अमित कुमार ने क्लीनिक सील किया, फिर खुलने दिया? हाईकोर्ट में फंसा मामला
HIGHLIGHTS:

➡️ रेशमा क्लीनिक को नोडल अफसर ने 11 सितंबर को सील किया
➡️ कुछ घंटों बाद ‘मां पाली क्लीनिक’ उसी जगह से चालू
➡️ संविदा नर्स सुमनलता की याचिका में गंभीर आरोप
➡️ सरकारी मरीजों को निजी क्लीनिक में भेजे जाने का दावा
➡️ हाईकोर्ट नोटिस पड़ा तो नोडल अफसर मुश्किल में

हसीन दानिश, जन माध्यम।

बरेली। बरेली में चर्चित “रेशमा क्लीनिक” प्रकरण अब नए मोड़ पर है। सीएचसी शीशगढ़ के नोडल अफसर अमित कुमार, जिनकी मौजूदगी में 11 सितंबर 2025 को एएनएम पूनम देवी के अवैध “रेशमा क्लीनिक एंड अल्ट्रासाउंड सेंटर” को धूमधाम से सील किया गया था, अब खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं।
उस दिन डीओ गजेंद्र सिंह और बीपीएम प्रेम गंगवार की टीम के साथ वे पूरे आत्मविश्वास में दिखाई दिए क्लीनिक सील, ताला लगा, फोटो खिंची, सोशल मीडिया पर सराहना बटोरी। लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसी भवन, उसी कमरे और उसी बोर्ड की जगह पर नया नाम “मां पाली क्लीनिक” उभर आया और धंधा फिर उसी तरह शुरू हो गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल अब हाईकोर्ट पहुंच चुका है। संविदा नर्स सुमनलता ने अपनी याचिका में साफ आरोप लगाया है कि “नोडल अधिकारी अमित कुमार ने अवैध क्लीनिक को सिर्फ औपचारिकता के तौर पर सील किया। तुरंत बाद उसी जगह नया बोर्ड लगाकर क्लीनिक को फिर चालू कर दिया गया। यहां तक कि गर्भवती महिलाओं को सरकारी सीएचसी भेजने के बजाय उसी निजी क्लीनिक में डिलीवरी के लिए ले जाया जा रहा है।”

अब सवाल सीधे-सीधे नोडल अफसर पर खड़े हो रहे हैं -
क्या सीलिंग सिर्फ कैमरों के लिए थी?
फॉलो-अप क्यों नहीं हुआ?
नया बोर्ड लगते ही जानकारी क्यों नहीं मिली?
क्या कहीं कोई “समझौता” हुआ, जिसकी वजह से ताला रातों-रात उड़ गया?

सूत्र यह भी बताते हैं कि मामला बढ़ता देख अमित कुमार सीएमओ ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं और पुराने कागज़ात गायब करने की कोशिशें तेज हैं। उधर, सुमनलता ने हाईकोर्ट में ये तक लिख दिया है कि उनकी बर्खास्तगी की असली वजह यही शिकायतें हैं जिनमें अमित कुमार का नाम बार-बार आया।

अब इंतज़ार इस बात का है कि हाईकोर्ट नोटिस जारी करता है या नहीं, क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो नोडल साहब की कुर्सी से लेकर करियर तक पर बादल घिरना तय है।
जन माध्यम पूछता है - अमित कुमार जी, सीलिंग कार्रवाई थी… या सिर्फ दिखावा? आख़िर ताले की चाबी किसकी जेब में गई?