कैनविज का काला खेल

इज्जतनगर निवासी ललित मोहन ने कैनविज ग्रुप के CMD कन्हैया गुलाटी पर करोड़ों की ठगी, फरेब और धमकी का आरोप लगाते हुए एसएसपी से कार्रवाई की मांग की।

कैनविज का काला खेल
HIGHLIGHTS:

➡️ कैनविज ग्रुप पर करोड़ों की ठगी का गंभीर आरोप
➡️ CMD कन्हैया गुलाटी और साथियों पर फरेब व धमकी का मामला
➡️ निवेशकों से 6.25 लाख रुपये लेने का आरोप
➡️ चेक बाउंस, कंपनी खाते में सिर्फ ₹3,500 मिले
➡️ पीड़ित ने धोखाधड़ी व धमकी में सख्त कार्रवाई की मांग की

कन्हैया गुलाटी पर ठगी, फरेब और धमकी के संगीन आरोप पीड़ित की उम्मीदों को लगाया गहरा आघात

जन माध्यम 
बरेली। इज्जतनगर थाना क्षेत्र की गुरु नानक कॉलोनी में रहने वाले ललित मोहन ने जब कैनविज ग्रुप और उसके सीएमडी कन्हैया गुलाटी पर भरोसा किया था, तब शायद उन्हें अंदेशा भी नहीं था कि यह भरोसा एक दिन गहरे दर्द में बदल जाएगा। गुरुवार को उन्होंने एसएसपी को एक विस्तृत प्रार्थना-पत्र सौंपकर करोड़ों की ठगी का आरोप लगाया। उनकी बातों में छल का ऐसा घाव छलकता दिखा, जिसे केवल कानून ही नहीं, इंसाफ़ भी भर सकता है। ललित मोहन ने बताया कि कन्हैया गुलाटी और जगतपाल मौर्या द्वारा संचालित कैनविज ग्रुप और के.एम संगठन  के चमचमाते प्लान दिखाकर उनसे और उनके भाई अमित यादव से बड़ी रकम निवेश कराई गई। 23 दिसंबर 2024 को टीम के सदस्य विशाल मौर्या, राहुल मौर्या, पुष्पेंद्र और सोनू चन्द्रा ने भरोसा दिलाया कि रकम सुरक्षित है, मुनाफा मिलेगा, और सबसे बड़ी बात मूलधन कभी भी वापस मिल जाएगा। यही मीठे वादे ललित और उनके भाई को 4,25,000 और 2,00,000 जमा करवाने के लिए काफी थे।लेकिन जैसे ही अप्रैल 2025 में उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई वापस मांगी, कहानी बदल गई। पहले उन्हें 17 मई की तारीख दी गई, फिर 30 जुलाई को दोबारा वादा किया गया। इतना ही नहीं, सीएमडी  कन्हैया गुलाटी ने 60 दिनों में राशि लौटाने का आश्वासन दिया पर वादे हवा की तरह उड़ते रहे। दबाव बढ़ाने पर 7 नवंबर को दो चेक दिए गए, पर बैंक की मशीन ने जैसे सच बोल दिया कंपनी के खाते में सिर्फ ₹3,500। यह देखकर स्पष्ट हो गया कि चेक भुगतान की नीयत से नहीं, बल्कि गुमराह करने की मंशा से दिए गए थे। और जब पीड़ित पक्ष स्पष्टीकरण मांगने पहुँचा, तो आरोपियों ने गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी तक दे डाली। ललित मोहन ने एसएसपी से मांग की है कि कन्हैया गुलाटी, जगतपाल मौर्या और अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, धमकी, आपराधिक षड्यंत्र और चेक अनादरण के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए। यह मामला सिर्फ पैसों का नहीं एक आम आदमी के टूटे विश्वास का है, जिसे इंसाफ़ की सख्त जरूरत है।