सुप्रीम कोर्ट की छुट्टियों पर सख्ती, अर्जेंसी की होगी असली परीक्षा

सुप्रीम कोर्ट की 17 दिन की विंटर वेकेशन के दौरान अर्जेंट मामलों की सुनवाई पर CJI सूर्यकांत ने सख्त शर्तें तय की हैं। बिना ठोस अर्जेंसी और पूरी तैयारी के किसी मामले की लिस्टिंग नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट की छुट्टियों पर सख्ती, अर्जेंसी की होगी असली परीक्षा
HIGHLIGHTS:

➡️ सुप्रीम कोर्ट में 17 दिन की विंटर वेकेशन शुरू
➡️ 4 जनवरी तक नियमित सुनवाई बंद
➡️ CJI सूर्यकांत का दो टूक—तैयारी नहीं तो लिस्टिंग नहीं
➡️ हर अर्जेंसी नहीं मानी जाएगी आपात मामला
➡️ कस्टडी, जमानत और गिरफ्तारी मामलों पर भी सख्त जांच
➡️ 22 दिसंबर को स्पेशल वेकेशन सिटिंग की संभावना

जन माध्यम
नई दिल्ली। जैसे ही सुप्रीम कोर्ट की विंटर वेकेशन नजदीक आई, न्याय के गलियारों में बेचैनी साफ नजर आने लगी। चार जनवरी तक नियमित सुनवाई बंद होने की घोषणा के बाद यह सवाल तेजी से उठा कि अर्जेंट मामलों का क्या होगा? इसी चिंता को लेकर शुक्रवार को वकीलों ने तत्काल सुनवाई की मांग रखी, लेकिन मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस पर बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया।

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार से चार जनवरी तक 17 दिन की छुट्टियां शुरू हो रही हैं और नियमित सुनवाई अब पांच जनवरी 2025 से होगी। इसी अंतराल को लेकर वकीलों ने नए और लंबित मामलों की अर्जेंट लिस्टिंग की मांग की। इस पर CJI ने दो टूक कहा कि शुक्रवार को किसी भी नए मामले की लिस्टिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी

CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस सप्ताह पहले ही भारी संख्या में फाइलिंग हो चुकी है और जजों पर फाइलें पढ़ने का अत्यधिक दबाव है। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा—“अगर आज नए मामले लिस्ट कर दिए गए, तो जज फाइलें पढ़ेंगे कब?” यह टिप्पणी केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि न्यायिक अनुशासन का संकेत भी मानी जा रही है।

सोमवार की संभावित सुनवाई को लेकर भी CJI ने शर्तें साफ कर दीं। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले की लिस्टिंग तभी होगी, जब वकील उसी दिन बहस के लिए पूरी तरह तैयार हों। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि रजिस्ट्री पहले यह जांच करेगी कि मामला वास्तव में अर्जेंट है या नहीं।

यहां तक कि बच्चों की कस्टडी, जमानत या गिरफ्तारी जैसे मामलों में भी अब अर्जेंसी को आंख मूंदकर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अगर जांच में यह साबित हुआ कि मामला वास्तव में आपात स्थिति का है, तभी उसे 22 दिसंबर को होने वाली स्पेशल वेकेशन सिटिंग में लिस्ट किया जाएगा। CJI ने यह भी जोड़ा कि उस दिन एक बेंच बैठेगी या नहीं, इसका फैसला मामलों की संख्या को देखकर ही किया जाएगा।

इस बीच न्यायिक व्यवस्था में बदलाव की तस्वीर दिल्ली हाई कोर्ट में भी देखने को मिली। राजधानी में ग्रैप-4 लागू होने और प्रदूषण पर काबू न पाने की स्थिति को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने सर्कुलर जारी कर हाइब्रिड मोड में काम करने की व्यवस्था लागू कर दी है। अब वकील और पक्षकार शारीरिक या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, दोनों माध्यमों से पेश हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख साफ संकेत देता है कि अब “अर्जेंसी” एक शब्द नहीं, बल्कि कसौटी होगी—जिस पर हर मामला परखा जाएगा। छुट्टियों में भी न्याय मिलेगा, लेकिन केवल उन्हें, जिनकी ज़रूरत सच में तत्काल है।