गायब मतदाता, प्रशासन की चुनौती
बरेली में एसआईआर अभियान के बावजूद सात लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची में न होने की आशंका ने प्रशासन और राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। पंचायत और विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची बड़ी चुनौती बन गई है।
➡️ एसआईआर अभियान 4 नवंबर से 26 दिसंबर तक चला
➡️ 2003 की मतदाता सूची से लिंक न मिलने की समस्या
➡️ बीएलओ-बीएलए की दिन-रात मेहनत
➡️ सात लाख से अधिक नाम गायब होने की आशंका
➡️ राजनीतिक दलों में बढ़ी बेचैनी
➡️ घर-घर नाम जोड़ने और हटाने की कवायद
➡️ अंतिम सूची पर टिकी सबकी निगाहें
जन माध्यम। बरेली।
पंचायत चुनाव की तैयारियों और आगामी विधानसभा चुनाव की दृष्टि से जिले में एसआइआर अभियान 4 नवंबर से 26 दिसंबर तक जारी रहा। इस दौरान 2003 की मतदाता सूची में लिंक न मिलने और स्थानांतरित हुए मतदाताओं को खोजने के लिए बीएलओ ब्लॉक स्तर अधिकारी ने दिन रात मेहनत की। लेकिन बावजूद इसके बड़ी संख्या में मतदाताओं की पहचान सूची में नहीं हो पाई, जिससे राजनीतिक दलों में असमंजस और बेचैनी बढ़ गई है। जिला प्रशासन की सक्रियता के अनुरूप, भारतीय जनता पार्टी ने अपने जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे घर घर जाकर पात्र मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ें और अपात्रों के नाम हटवाने का काम सुनिश्चित करें। इस जिम्मेदारी के लिए बीएलए ब्लॉक स्तर एजेंट बनाए गए, जिन्होंने कई क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बावजूद जिले में सात लाख से अधिक मतदाताओं के नाम कटने या सूची में न होने की आशंका ने राजनीतिक हलकों में बेचैनी बढ़ा दी है। बीएलओ और बीएलए की अथक मेहनत के बावजूद यह अभियान सर्दियों की ठंड में भी जारी रहा। प्रशासन का प्रयास रहा कि हर पात्र मतदाता को सूची में शामिल किया जाए और किसी का हक न छिन सके। परंतु व्यापक संख्या और स्थानांतरण की वजह से कई मतदाता सूची से बाहर रह गए।
इस स्थिति ने राजनीतिक दलों के नेताओं को सक्रियता और रणनीति बनाने के लिए मजबूर कर दिया है। गांव गांव और नगरों में उनके दौरे और पैठ बनाने के प्रयास तेज हो गए हैं। अब सभी की निगाहें आगामी अपडेट और अंतिम सूची पर टिकी हैं, क्योंकि इस पर कई उम्मीदवारों के भविष्य और चुनावी समीकरण निर्भर हैं। एसआइआर अभियान ने दिखा दिया कि प्रशासन और बीएलओ बीएलए की मेहनत के बावजूद भी मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक बनाना कितना चुनौतीपूर्ण काम है। यही वजह है कि चुनावी हलकों में बेचैनी और उत्सुकता के बीच गायब मतदाताओं की खोज जारी है।