झोलाछाप डॉक्टर ने ली एक और जान, इलाज कराने गई आशा कार्यकर्ता की मौत

झोलाछाप डॉक्टर ने ली एक और जान, इलाज कराने गई आशा कार्यकर्ता की मौत
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HIGHLIGHTS:

1. स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी से बेखौफ झोलाछाप, हर गली-मोहल्ले में खुला है मौत का क्लिनिक

Bareilly News: देहात के मीरगंज में फिर एक ज़िंदगी झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही की भेंट चढ़ गई। बहरौली गांव में 40 वर्षीय आशा कार्यकर्ता सुनीता की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि एक झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज की वजह से सुनीता की जान गई।
इससे पहले भी मीरगंज में 17 साल की युवती नसरीन की जान झोलाछाप की लापरवाही ने ले ली थी। 

बुखार में गई थी इलाज कराने, लौटी नहीं

परिजनों के मुताबिक सुनीता को हल्का बुखार था। इलाज के लिए वह बहरौली में एक प्राइवेट क्लिनिक पर गई, जो कि कथित तौर पर झोलाछाप डॉक्टर चला रहा था। इलाज के दौरान ही सुनीता की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया। सुनीता अपने पीछे पति श्यामवीर मौर्य, बेटे-बहू, बेटी और एक छोटे बेटे को छोड़ गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने नहीं लिया सबक, मौन साधे बैठा है स्वास्थ्य महकमा

हैरानी की बात ये है कि एक हफ्ते पहले मीरगंज में ही 17 साल की नसरीन की मौत झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से हुई थी। उस वक्त सीएचसी मीरगंज की टीम ने एक क्लिनिक सीज जरूर किया था, लेकिन उसके बाद न कोई औचक निरीक्षण हुआ और न ही कोई बड़ी कार्रवाई। हर गली में चल रहे ऐसे क्लिनिक मौत बांट रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे बैठा है। सवाल यह भी उठता है कि क्या इन अवैध क्लीनिकों के संचालन में विभाग की मिलीभगत है? एक के बाद एक मौतें और विभाग सिर्फ कागजी कार्रवाई में उलझा है। आखिर और कितनी जानें जाएंगी, तब जाकर इन झोलाछाप डॉक्टरों पर शिकंजा कसा जाएगा?