गरीबों के राशन से खिलवाड़

बरेली में गरीबों को मिलने वाले राशन में कंकड़, मिट्टी और घटिया अनाज की शिकायतें बरकरार हैं। एफएसडीए की कागज़ी जांच और सिस्टम की ढील पर फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गरीबों के राशन से खिलवाड़
सांकेतिक फोटो
HIGHLIGHTS:

➡️ गरीबों के राशन में कंकड़-मिट्टी की पुरानी शिकायत
➡️ एफएसडीए की जांच सिर्फ कागज़ों तक सीमित?
➡️ 7.24 लाख कार्डधारक, 1725 कोटेदार सिस्टम के भरोसे

जन माध्यम 
बरेली।
वर्षों से गरीबों के हिस्से के राशन में कंकड़, मिट्टी और घटिया अनाज की शिकायतें आती रही हैं, लेकिन हर बार जांच सिर्फ फाइलों और अख़बारों की सुर्खियों तक सिमट कर रह जाती थी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन एफएसडीए विभाग पर यह आरोप आम है कि वह मौके पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिकताएं निभाता है। अब एक बार फिर दावा किया जा रहा है कि इस बार गरीबों के राशन की गुणवत्ता की सख्त जांच होगी। सवाल यह है कि क्या यह वाकई बदलाव है या फिर वही पुरानी खानापूर्ति का नया संस्करण?

खाद्य एवं रसद विभाग के तहत जिले के करीब 7.24 लाख कार्डधारकों को हर महीने 1725 कोटेदारों के माध्यम से गेहूं और चावल वितरित किया जाता है। लंबे समय से कार्डधारकों की शिकायत रही है कि राशन में कंकड़, मिट्टी, टूटा अनाज और नमी मिली होती है। कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन जांच का नतीजा अक्सर शून्य ही रहा। न कोटेदारों पर ठोस कार्रवाई हुई और न ही एफएसडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। अब जिला प्रशासन के निर्देश पर कहा जा रहा है कि इस बार वितरण से पहले ही एफएसडीए की टीमें कोटेदारों की दुकानों पर जाकर सैंपल लेंगी और उन्हें जांच के लिए भेजा जाएगा। यदि गेहूं या चावल मानक के विपरीत पाया गया तो संबंधित कोटेदार के खिलाफ कार्रवाई तय की जाएगी। सुनने में यह फैसला सख्त लगता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि पहले भी ऐसे निर्देश कई बार जारी हो चुके हैं, जिनका अंजाम सिर्फ कागज़ी कार्रवाई तक सीमित रहा। इस बार वितरण प्रणाली में भी बदलाव किया गया है। पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल दिए जाएंगे, जबकि अंत्योदय कार्डधारकों को 21 किलो गेहूं और 14 किलो चावल मिलेगा। मात्रा बदलने से ज्यादा जरूरी सवाल गुणवत्ता का है, क्योंकि पेट भरने के लिए सिर्फ वजन नहीं, बल्कि साफ और सुरक्षित अनाज भी चाहिए। अगर वही कंकड़ मिट्टी मिला राशन मिला, तो बदलाव का क्या मतलब? जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार सिंह का कहना है कि शासन स्तर से वितरण की तारीख तय होगी और यदि कोई कोटेदार घटतौली या मिलावट करता पाया गया तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।

एफएसडीए के माध्यम से वितरण से पहले ही राशन की गुणवत्ता जांची जाएगी। लेकिन यही वह मोड़ है जहां सिस्टम की साख पर सवाल उठता है। क्या एफएसडीए वाकई निष्पक्ष जांच करेगा या फिर पुराने अनुभव की तरह कुछ सैंपल लेकर रिपोर्ट क्लीन बना दी जाएगी?