सुपरवाइजर से जातिसूचक गाली-गलौज का आरोप, पार्षद पर गंभीर धाराएं लगाने की मांग
मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में नगर निगम सुपरवाइजर ने वार्ड 72 के पार्षद पर जातिसूचक गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाया। कार्रवाई की मांग को लेकर निगम कर्मचारियों ने थाने का घेराव किया।
➡️ नगर निगम सुपरवाइजर ने पार्षद पर जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का लगाया आरोप
➡️ लिसाड़ी गेट थाने का घेराव कर कर्मचारियों ने किया जोरदार प्रदर्शन
➡️ SC/ST एक्ट सहित गंभीर धाराओं में मुकदमे की मांग
➡️ कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
हशमे आलम । जन माध्यम
मेरठ। लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसमें नगर निगम के एक सुपरवाइजर ने वार्ड 72 के पार्षद शाहिद छंगा पर गाली-गलौज करने और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित करने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि पार्षद ने न केवल अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, बल्कि जातिगत टिप्पणी करते हुए धमकी भी दी, जिससे वह मानसिक रूप से आहत हुआ है।
घटना की जानकारी मिलते ही नगर निगम कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में निगम कर्मचारी एकजुट होकर लिसाड़ी गेट थाने पहुंचे और आरोपी पार्षद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर थाने का घेराव किया। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
पीड़ित सुपरवाइजर ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि वह अपने विभागीय कार्य से संबंधित मामले में वार्ड क्षेत्र में गया था, इसी दौरान पार्षद ने उससे अभद्रता की। आरोप है कि बातचीत के दौरान पार्षद ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया और सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद खुलेआम अपमानित किया। पीड़ित का कहना है कि इस तरह की घटनाएं कर्मचारियों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाती हैं और कार्यस्थल पर भय का माहौल बनाती हैं।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे कर्मचारी वर्ग के सम्मान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने मांग की कि आरोपी पार्षद के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित अन्य सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
सूचना पर पुलिस अधिकारियों ने कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। पुलिस का कहना है कि तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के सामने आने के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस घटना को लेकर नगर निगम कर्मचारियों में रोष व्याप्त है और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो कर्मचारी संगठन बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।