सर्दी की धुंध में बुझ गईं दो जिंदगियां

बरेली में घने कोहरे के बीच तेज रफ्तार ट्रक ने ई-रिक्शा को टक्कर मार दी, हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई और दो गंभीर घायल हैं।

सर्दी की धुंध में बुझ गईं दो जिंदगियां
HIGHLIGHTS:

➡️ घने कोहरे में हुआ भीषण सड़क हादसा
➡️ तेज रफ्तार ट्रक ने ई-रिक्शा को मारी टक्कर
➡️ मजदूर सलीम और नसरुद्दीन की मौके पर मौत
➡️ दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल
➡️ चार मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
➡️ ट्रक चालक वाहन छोड़कर फरार
➡️ पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेजे
➡️ सर्दी और रोज़ी की जद्दोजहद की दर्दनाक कहानी

जन माध्यम।
हसीन दानिश | बरेली।

ठंड की कड़कड़ाती सुबह, चारों ओर छाया घना कोहरा और रोज़ी-रोटी की तलाश में घर से निकले मजदूर। रिछोला गांव निवासी मोहम्मद सलीम अपने साथी नसरुद्दीन और दो अन्य मजदूरों के साथ ई-रिक्शा से लाडपुर की ओर जा रहे थे। नल लगाने का काम मिला था और सलीम ने घर से निकलते वक्त बच्चों से कहा था कि जल्दी लौटकर उनके लिए गर्म कपड़े लाएंगे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह उनकी आखिरी सुबह होगी।

राजश्री कॉलेज के पास पहुंचते ही सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने कोहरे के बीच ई-रिक्शा को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयावह थी कि ई-रिक्शा के परखच्चे उड़ गए। मौके पर ही मोहम्मद सलीम और नसरुद्दीन की मौत हो गई, जबकि ई-रिक्शा पर सवार दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

सलीम की मौत की खबर जैसे ही रिछोला गांव पहुंची, पूरे परिवार में कोहराम मच गया। चार मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। पत्नी और बुजुर्ग मां का रो-रोकर बुरा हाल है। बार-बार बेहोश हो रही पत्नी के होंठों पर सिर्फ एक ही सवाल है—अब बच्चों का क्या होगा। सलीम मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पालते थे और ठंड में भी बच्चों को भूखा नहीं सोने देते थे। आज वही ठंड और कोहरा उनके लिए काल बन गया।

मृतक सलीम के साले मोहम्मद अकरम ने भर्राई आवाज में बताया कि सलीम बेहद मेहनती और जिम्मेदार इंसान थे। सुबह निकलते थे और देर शाम थके-हारे लौटते थे। बच्चों के भविष्य के लिए दिन-रात संघर्ष करते रहे, लेकिन एक पल में सब कुछ खत्म हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घने कोहरे के कारण ट्रक चालक को सामने कुछ दिखाई नहीं दिया और तेज रफ्तार ने हादसे को और भी भयावह बना दिया। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और फरार चालक की तलाश में जुटी हुई है।

यह हादसा सिर्फ दो मौतों की खबर नहीं है, बल्कि उन हजारों मजदूरों की पीड़ा का प्रतीक है जो हर दिन सर्दी, कोहरे और जान जोखिम में डालकर अपने बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी कमाने निकलते हैं। सलीम और नसरुद्दीन की जिंदगियां भले ही धुंध में खो गई हों, लेकिन उनके बच्चों की आंखों में बसे सवाल समाज और व्यवस्था से जवाब मांगते रहेंगे।