स्लैब फाड़कर निकला भ्रष्टाचार

बरेली के मौलानगर में 'मजबूत' स्लैब का एक हफ्ते में अंतिम संस्कार, नगर निगम का भ्रष्टाचार फिर 'सफल'

स्लैब फाड़कर निकला भ्रष्टाचार
HIGHLIGHTS:

➡️ मौलानगर में नाली पर डाला गया स्लैब 7 दिन में टूटा
➡️ सरिया बाहर, स्लैब नाली में गिरा
➡️ घटिया सामग्री और निगरानी की पोल खुली
➡️ पैदल और वाहन चालकों की जान पर खतरा
➡️ न चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेडिंग
➡️ स्थानीय लोगों ने कार्रवाई की मांग उठाई

जन माध्यम
बरेली।
मौलानगर मोहल्ले के नाली पर नगर निगम ने जो 'अटूट' और 'लाइफटाइम गारंटी' वाला स्लैब लगभग एक हफ्ते पहले बनवाया था, वह अब सरिया नंगाकर के जमीन पर लेटा रो रहा है। महज 7 दिन में इतना पावरफुल ब्रेकअप कि पूरा मोहल्ला हैरान है। निगम की इंजीनियरिंग इतनी कमजोर थी या ठेकेदार की जेब इतनी भारी?

स्थानीय लोग अब खुले में सरिया देखकर मजाक उड़ा रहे हैं - "भाई स्लैब नहीं, ये तो कागज का टुकड़ा था, बस कंक्रीट का रंग लगाकर फोटो खिंचवा लिए होंगे!" निवासियों का सीधा इल्ज़ाम है कि घटिया माल, घटिया काम और घटिया निगरानी – तीनों मिलकर नगर निगम का 'ट्रिपल इंजन' बन गए हैं।

एक बुजुर्ग ने तंज कसते हुए कहा, "एक हफ्ते में स्लैब टूट गया, लगता है निगम वालों ने सोचा होगा - हमारी गारंटी जिंदगी भर की नहीं, बस फोटो सेशन तक की है।"

शहर में यह कोई नई कहानी नहीं। नाले के स्लैब टूटते हैं, लोग गिरते हैं, शिकायतें होती हैं, फोटो आती हैं, फिर सब शांत। लेकिन इस बार लोग चुप नहीं बैठने वाले। सवाल वही पुराना है - क्या नगर निगम अब भी "जल्दी करवा लेंगे" वाला राग अलापेगा, या आखिरकार किसी की नींद टूटेगी?

मौहल्ला मौलानगर में हाल ही में ठीक की गई एक सड़क अब स्थानीय लोगों के लिए राहत के बजाय मुसीबत बनती जा रही है। सड़क निर्माण के साथ ही मौहल्ले के अंदर जाने वाली दूसरी सड़क को जोड़ने के लिए बीच में बनी नाली पर एक छोटी पुलिया नुमा स्लैब डाली गई थी, ताकि लोगों को दैनिक आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो। लेकिन निर्माण के कुछ ही दिनों के भीतर यह स्लैब टूटकर नाली में गिर गई, जिससे लोगों की जान पर खतरा मंडराने लगा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्लैब निर्माण में घटिया दर्जे की सामग्री का इस्तेमाल किया गया। यही वजह है कि लगभग एक सप्ताह के भीतर ही स्लैब का बीच का बड़ा हिस्सा भरभराकर टूट गया और नाली में जा गिरा। अब टूटी हुई स्लैब न केवल आवागमन में बाधा बन रही है, बल्कि यह एक गंभीर दुर्घटना को न्योता दे रही है।

मौहल्लेवासियों के अनुसार, इस रास्ते से रोजाना पैदल राहगीरों के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन गुजरते हैं। खासकर सुबह और रात के समय घना कोहरा छाए रहने के कारण टूटी स्लैब साफ दिखाई नहीं देती। ऐसे में किसी भी समय वाहन फिसलने या नाली में गिरने का खतरा बना हुआ है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह रास्ता और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है।

लोगों का आरोप है कि निर्माण के समय न तो गुणवत्ता की जांच की गई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर जाकर काम का निरीक्षण किया। ठेकेदार ने जल्दबाजी में काम पूरा कर फोटोशूट किया और भुगतान करा लिया होगा, लेकिन परिणाम अब जनता भुगत रही है। टूटी स्लैब को लेकर अब तक न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है और न ही बैरिकेडिंग की गई है, जिससे हादसे की आशंका और बढ़ गई है।

स्थानीय निवासियों ने नगर निगम और संबंधित विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द टूटी स्लैब को हटाकर मजबूत और टिकाऊ पुलिया का निर्माण कराया जाए। साथ ही निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्थानिय लोग सवाल पुछ रहे हैं कि—

जब सड़क और पुलिया का निर्माण किया गया, तो गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई?

घटिया सामग्री इस्तेमाल करने के बावजूद ठेकेदार को भुगतान कैसे कर दिया गया?

जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई?

अगर किसी दिन बड़ा हादसा हो गया, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है और मौहल्ले के लोगों को इस खतरे से कब राहत मिलती है।