भोजीपुरा मुठभेड़ के बीच ‘हाफ एनकाउंटर’ बहस तेज
बरेली के भोजीपुरा में गौकशी सूचना पर मुठभेड़ में दो गिरफ्तार, एक घायल। सहारनपुर के कथित हाफ एनकाउंटर मामले और हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद पारदर्शिता पर बहस तेज।
➡️ भोजीपुरा में तड़के मुठभेड़, दो आरोपी गिरफ्तार
➡️ एक बदमाश के पैर में गोली, सिपाही भी घायल
➡️ सहारनपुर प्रकरण के बाद ‘हाफ एनकाउंटर’ पर सवाल
➡️ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी से बहस और तेज
सेय्यद शाहाबुद्दीन । जन माध्यम
बरेली। जनपद के थाना भोजीपुरा क्षेत्र में शनिवार तड़के पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक आरोपी पैर में गोली लगने से घायल हो गया। मुठभेड़ के दौरान एक सिपाही भी गोली छूते हुए निकल जाने से जख्मी हुआ है। दोनों घायलों को उपचार के लिए सीएचसी भोजीपुरा भेजा गया है।
पुलिस के अनुसार 14 फरवरी की रात गश्त के दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम सिघांई कायस्थान के जंगल में कुछ संदिग्ध गौकशी की फिराक में मौजूद हैं। घेराबंदी के दौरान करीब रात 2:10 बजे बदमाशों ने पुलिस पार्टी पर फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली कांस्टेबल रिंकू के बाजू को छूते हुए निकल गई। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें राजू पुत्र अली जान कुरैशी निवासी मोलागढ़, थाना भोजीपुरा के बाएं पैर में गोली लगी।
पुलिस ने राजू (घायल) और इकराम पुत्र छोटन निवासी वार्ड-9 धौराटांडा को गिरफ्तार किया है। मौके से एक अवैध तमंचा 315 बोर, खोखा व जिंदा कारतूस, अवैध छुरी और गौकशी के उपकरण बरामद होने का दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक घायल आरोपी के विरुद्ध पूर्व से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। फरार आरोपियों की तलाश में कॉम्बिंग जारी है।
हालांकि यह मुठभेड़ ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में ‘हाफ एनकाउंटर’ को लेकर बहस तेज है। सहारनपुर जनपद में कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले में देवबंद कोर्ट के एसीजीएम परविंदर सिंह स्वयं जेल पहुंचकर घायल कैदियों से पूछताछ कर चुके हैं। पूछताछ का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस कार्यशैली पर सवाल उठे हैं।

जेल में एक कैदी ने आरोप लगाया कि उसे पेशी पर जाते समय हिरासत में लेकर थाने में मारपीट और करंट दिया गया तथा बाद में जंगल में ले जाकर पैर में गोली मारकर मुठभेड़ का रूप दिया गया। मामले में न्यायालय में याचिका दायर है और अन्य घायल कैदियों से भी पूछताछ की गई है।
इससे पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने एनकाउंटर की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि प्रदेश को ‘पुलिस राज्य’ नहीं बनने दिया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में आरोपियों के पैरों में गोली मारने की प्रवृत्ति चिंता का विषय है।
ऐसे परिदृश्य में भोजीपुरा जैसी घटनाएं स्वाभाविक रूप से व्यापक बहस का हिस्सा बन जाती हैं। एक ओर पुलिस का दावा है कि कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई, वहीं दूसरी ओर हालिया विवादों के चलते हर मुठभेड़ की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग भी जोर पकड़ रही है। कानून-व्यवस्था और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना फिलहाल सबसे बड़ी कसौटी बना हुआ है।