स्कूल वाहनों पर सख्ती
बरेली में परिवहन विभाग ने मानकविहीन स्कूल वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया। 42 वाहनों की जांच में नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की गई।
➡️ स्कूल वाहनों के खिलाफ विशेष जांच अभियान
➡️ 42 बसों और स्कूल वाहनों की सघन जांच
➡️ मानकविहीन वाहनों पर चालान की कार्रवाई
➡️ विद्यालय प्रबंधन को सख्त निर्देश
जनमाध्यम
बरेली। बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो, इस उद्देश्य को लेकर परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश एवं शासन के निर्देशों के अनुपालन में जनपद में अनफिट और मानकविहीन स्कूल वाहनों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को प्रवर्तन दल के अधिकारियों और मोटर वाहन निरीक्षकों द्वारा जिले में व्यापक जांच अभियान संचालित किया गया।
अभियान के दौरान कुल 42 स्कूल बसों और अन्य स्कूल वाहनों की सघन जांच की गई। जांच में कई वाहन निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिनके विरुद्ध नियमानुसार चालान की कार्रवाई की गई। इसके अलावा चार स्कूल वाहनों के मामलों में संबंधित विद्यालय प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए गए कि वे आवश्यक मानकों की पूर्ति किए बिना वाहनों का संचालन न करें। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि फिटनेस प्रमाण पत्र, वैध परमिट, अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स, स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी कैमरे और अन्य अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी है। जांच के दौरान न केवल कार्रवाई की गई, बल्कि विद्यालय प्रबंधन, वाहन चालकों और परिचालकों को स्कूल वाहनों से जुड़े सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक भी किया गया। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि बच्चों की जान और सुरक्षा के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि भविष्य में कोई भी स्कूल वाहन बिना मानकों के संचालित पाया गया, तो उसके विरुद्ध और अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान एक दिन का नहीं है, बल्कि आगे भी नियमित रूप से ऐसे चेकिंग अभियान चलाए जाएंगे। इसका उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल जाने वाले हर बच्चे की यात्रा पूरी तरह सुरक्षित हो। विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों के स्कूल वाहनों की स्थिति पर नजर रखें और किसी भी अनियमितता की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें। परिवहन विभाग का मानना है कि प्रशासन, विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों के साझा प्रयास से ही बच्चों की सुरक्षित यात्रा को सुनिश्चित किया जा सकता है।