जब सुशासन ने स्मृतियों में अटल को जीवित कर दिया

मीरगंज के स्वामी दयानंद सरस्वती इंटर कॉलेज परौरा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की जयंती सुशासन दिवस के रूप में मनाई गई। छात्रों ने भाषणों के जरिए अटल जी के विचारों और राष्ट्रसेवा के संदेश को जीवंत किया।

जब सुशासन ने स्मृतियों में अटल को जीवित कर दिया
HIGHLIGHTS:

➡️ मीरगंज में अटल बिहारी वाजपेई की जयंती सुशासन दिवस के रूप में मनाई गई
➡️ दयानंद सरस्वती इंटर कॉलेज परौरा में आयोजित हुए सभी कार्यक्रम
➡️ अटल जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दी गई श्रद्धांजलि
➡️ छात्रों ने भाषणों से अटल जी के विचारों को किया जीवंत
➡️ सुशासन, पारदर्शिता और राष्ट्रसेवा का दिया गया संदेश
➡️ शिक्षकों और प्रबंधन ने अटल जी के जीवन से सीख लेने का आह्वान किया

जन माध्यम।

करण पाल सिंह। मीरगंज (बरेली)।
कुछ नाम समय की दीवारों पर नहीं टिकते, वे दिलों में बस जाते हैं। कुछ व्यक्तित्व सत्ता से नहीं, संस्कारों से पहचाने जाते हैं। भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई ऐसे ही युगपुरुष थे, जिनकी जयंती मीरगंज क्षेत्र में सुशासन दिवस के रूप में पूरे सम्मान और भावनात्मक गरिमा के साथ मनाई गई।

स्वामी दयानंद सरस्वती इंटर कॉलेज परौरा में आयोजित कार्यक्रम में विद्यालय परिवार ने अटल जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उस विचारधारा को याद करने का प्रयास था, जिसने राजनीति को मर्यादा, संवाद और संवेदना सिखाई।

कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि अटल केवल अतीत नहीं, भविष्य की प्रेरणा हैं। रणबीर रावत, रघुवीर, सुखबीर, तरफिया अंसारी, काव्या, रोशनी, गुंजन, अनुष्का, राधिका, संतोष राजपूत और कार्तिक गंगवार ने अपने भाषणों के माध्यम से अटल बिहारी वाजपेई के जीवन, कृतित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान को शब्द दिए। मंच से निकले ये शब्द केवल भाषण नहीं थे, बल्कि एक पीढ़ी का सम्मान और सीख थे।

विद्यालय के प्रधानाचार्य आदेश पाल गंगवार ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई तीन बार प्रधानमंत्री रहे, लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि वे हर दिल में स्वीकार किए गए। वे ऐसे नेता थे, जिन्हें विरोधी भी सम्मान देते थे और समर्थक भी।

विद्यालय के निदेशक पंकज गंगवार ने अटल जी को राजनीति के साथ-साथ साहित्य और कविता का शिखर पुरुष बताया। उन्होंने कहा कि अटल जी की कविताएं आज भी राष्ट्रप्रेम, मानवीय संवेदना और आत्मचिंतन का आईना हैं।

विद्यालय के प्रबंधक डॉ. सत्यवीर गंगवार ने सुशासन दिवस के अर्थ को गहराई से समझाते हुए कहा कि सुशासन केवल योजनाओं या व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मअनुशासन, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा विचार है। उन्होंने कहा कि सच्चा सुशासन बाहर की नहीं, भीतर की सफाई से शुरू होता है।

इस अवसर पर शिक्षकगण संजीव गंगवार, अनुज गंगवार, कमल गंगवार, ओमेंद्र, भूपेंद्र, सुनीता गंगवार, नीरज गंगवार, लाल बहादुर, उमाशंकर गंगवार, रवि गोस्वामी, राजेश गंगवार सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राजेश गंगवार ने किया।

अटल बिहारी वाजपेई की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम एक बार फिर याद दिला गया कि नेतृत्व शोर से नहीं, चरित्र से पहचाना जाता है। अटल चले गए, लेकिन उनके विचार आज भी देश की आत्मा में जीवित हैं।