बांग्लादेश हिंसा: मेरठ में ज्ञापन, केंद्र से कार्रवाई की मांग

मेरठ में हिंदू स्वाभिमान संगठन ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ डीएम को ज्ञापन सौंपा। केंद्र से कूटनीतिक हस्तक्षेप और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की गई।

बांग्लादेश हिंसा: मेरठ में ज्ञापन, केंद्र से कार्रवाई की मांग
HIGHLIGHTS:

➡️ मेरठ कलेक्ट्रेट में 50–60 कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपा
➡️ डीएम ने ज्ञापन स्वीकार कर केंद्र को भेजने का आश्वासन दिया
➡️ शांतिपूर्ण विरोध, कोई हिंसा या सड़क जाम नहीं
➡️ मंदिरों पर हमलों और विस्थापन को रोकने की मांग
➡️ केंद्र सरकार से त्वरित कूटनीतिक हस्तक्षेप की अपील
➡️ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठाने का आह्वान
➡️ संविधान और मानवाधिकार की रक्षा के तहत विरोध

हशमे आलम/ जन माध्यम

घटना और ज्ञापन

22 दिसंबर 2025 को मेरठ कलेक्ट्रेट में हिंदू स्वाभिमान संगठन के लगभग 50–60 कार्यकर्ताओं ने डीएम डॉ. वीके सिंह को बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर कथित अत्याचारों के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मंदिरों पर हमलों, संपत्ति हड़पने और परिवारों के विस्थापन का विस्तृत विवरण दिया गया। कार्यकर्ता शांतिपूर्ण ढंग से पहुंचे, नारेबाजी और बैनर प्रदर्शन किया गया, लेकिन कोई हिंसा या सड़क जाम नहीं हुआ। डीएम ने ज्ञापन स्वीकार कर केंद्र को भेजने का आश्वासन दिया।


ज्ञापन की मुख्य मांगें और संगठन का दृष्टिकोण

संगठन ने केंद्र सरकार से त्वरित कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की, ताकि बांग्लादेश सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। ज्ञापन में मुख्य मांगें शामिल हैं:

  • बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना, शरणार्थी शिविर या वीज़ा सहायता देना।

  • संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाना।

  • देशभर के हिंदू संगठनों से एकजुटता और समर्थन की अपील।

  • सीमा सुरक्षा मजबूत करना और बांग्लादेशी घुसपैठ पर सख्ती।

संगठन का दावा है कि हाल के महीनों में 100+ मंदिर तोड़े गए और सैकड़ों हिंदू परिवार विस्थापित हुए। इसे “मानवीय संकट” बताते हुए कार्यकर्ताओं ने भारत से संवैधानिक और कूटनीतिक कार्रवाई की उम्मीद जताई।


पृष्ठभूमि और प्रभाव

बांग्लादेश में 2024 के बाद से सांप्रदायिक हिंसा बढ़ी है। हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय लगभग 8% आबादी पर हमला झेल रहा है। भारत ने पहले ही चिंता जताई है।
मेरठ में यह ज्ञापन पिछले आंदोलनों का विस्तार माना जा रहा है। पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए फोर्स तैनात किया। सोशल मीडिया पर #BangladeshHinduAtrocities और #MeerutProtest ट्रेंड कर रहे हैं, और लोग केंद्र से मजबूत कूटनीतिक कदम की मांग कर रहे हैं। संगठन ने 24 दिसंबर को बड़ा धरना आयोजित करने की घोषणा की है।


संविधान और मानवाधिकार दृष्टि

ज्ञापन और विरोध की नींव संविधान और मानवाधिकार की रक्षा पर आधारित है। भारत के अनुच्छेद 21 और 51 के तहत अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवाधिकार सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। कार्यकर्ता इस नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य को ध्यान में रखते हुए शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं।