प्राकृतिक खेती के नाम पर बड़ा खेल
प्राकृतिक खेती योजना में फर्जीवाड़े के आरोपों से बरेली कृषि विभाग में हड़कंप, सीएम तक पहुंची शिकायत के बाद जांच के आदेश और नए उप निदेशक की तैनाती।
➡️ प्राकृतिक खेती योजना में 25 लाख से अधिक के घोटाले का दावा
➡️ फर्जी खेती दिखाकर सब्सिडी जारी करने के गंभीर आरोप
➡️ कमीशनखोरी और टेंडरबाजी की शिकायत सीएम तक पहुंची
➡️ कृषि निदेशक को जांच के आदेश, विभाग में हड़कंप
➡️ बरेली को मिला नया उप निदेशक कृषि, प्रशासनिक सख्ती
बरेली कृषि विभाग में आरोपों की आंधी, प्राकृतिक खेती योजना में 25 लाख से ज्यादा के घोटाले का दावा, जांच के आदेश, नए उप निदेशक की तैनाती
डस्क/ जन माध्यम
बरेली। जिस योजना का मकसद किसानों को रसायन मुक्त खेती की ओर ले जाना था, वही योजना अब घोटाले, कमीशनखोरी और अफसरशाही की साजिशों में उलझ गई है। कृषि विभाग के उप निदेशक कार्यालय में चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। उप निदेशक अभिनंदन सिंह के निलंबन का विवाद अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब प्रभारी उप निदेशक अमर पाल पर प्राकृतिक खेती की प्रोत्साहन राशि में बड़े पैमाने पर घपले-घोटाले के गंभीर आरोप लग गए हैं।
मामला जब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा, तो शासन हरकत में आया। कृषि निदेशक को जांच के आदेश दिए गए और विभाग में हड़कंप मच गया। फाइलें खुलने लगीं, अफसर सतर्क हो गए और कुर्सियों के नीचे की ज़मीन खिसकने लगी।
सूत्रों के मुताबिक, शासन को भेजी गई शिकायत में दावा किया गया है कि आंवला और मीरगंज क्षेत्र में करीब 1,650 एकड़ भूमि पर फर्जी प्राकृतिक खेती दिखाकर 25 लाख रुपये से अधिक की सब्सिडी जारी कर दी गई। आरोप है कि जिन किसानों के खातों में यह राशि भेजी गई, उन्होंने ज़मीन पर कोई वास्तविक खेती की ही नहीं। इससे भी ज्यादा गंभीर आरोप यह है कि प्रोत्साहन राशि जारी करने के बदले 20 से 50 प्रतिशत तक कमीशन मांगा गया।
किसान मेले के टेंडर पर भी सवाल
शिकायत में घोटाले की परतें यहीं खत्म नहीं होतीं। आरोप है कि किसान मेलों के आयोजन के लिए ‘मां कल्याणी’ नाम की फर्म को नियमों को ताक पर रखकर टेंडर दिया गया। जब प्रक्रिया पर सवाल उठे तो सीडीओ ने टेंडर निरस्त कर दिया। हालांकि, इस पूरे मामले पर सीडीओ देवयानी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इसी बीच प्रभारी उप निदेशक अमर पाल पिछले 12–13 दिनों से अवकाश पर हैं। उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि जिले में कुछ कर्मचारी ऐसे हैं, जो किसी भी उप निदेशक को काम नहीं करने देते। उनका दावा है कि उन्होंने कोई नया टेंडर नहीं कराया, जो भी प्रक्रिया हुई वह पहले की थी।
लिपिक को भेजा गया कानूनी नोटिस
विवाद के बीच एक और मोड़ तब आया, जब विषय वस्तु विशेषज्ञ मुनेंद्र कुमार सैनी की ओर से अधिवक्ता प्रदीप कुमार उपाध्याय ने 16 दिसंबर को उप निदेशक कार्यालय के लिपिक सुनील कुमार को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में सवाल किया गया है कि उप निदेशक के नाम से डीएम को भेजा गया पत्र किसके आदेश पर लिखा गया और इसकी अनुमति किसने दी। तीन बिंदुओं पर जवाब मांगते हुए 15 दिन की समय-सीमा तय की गई है।
बरेली को मिला नया उप निदेशक
घोटालों और आरोपों के बीच शासन ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए बरेली के लिए नए उप निदेशक कृषि की तैनाती कर दी है। संयुक्त सचिव लाल बहादुर यादव द्वारा जारी आदेश के अनुसार हिमांशु पांडेय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे 16 दिसंबर को जौनपुर से स्थानांतरित होकर आए हैं, हालांकि अभी उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है।
कुल मिलाकर,
प्राकृतिक खेती की फाइलों में
अब सिर्फ योजनाएं नहीं,
सवाल, संदेह और सियासत भी बोई जा चुकी है।
अब देखना यह है कि जांच में
किसके हाथ साफ निकलते हैं
और किसके दामन पर दाग गहराते हैं।