बरेली में स्मार्ट सिटी के 'स्मार्ट' नाले बने मौत के गड्ढे

बरेली में खुले नाले में गिरकर ट्रक ड्राइवर की मौत, जांच में 5 जिम्मेदार दोषी। नगर निगम पर उठे गंभीर सवाल।

बरेली में स्मार्ट सिटी के 'स्मार्ट' नाले बने मौत के गड्ढे
HIGHLIGHTS:

खुले नाले में गिरकर ट्रक ड्राइवर की दर्दनाक मौत

जांच में 5 अधिकारी-कर्मचारी और ठेकेदार दोषी

30 घंटे बाद निकला शव, सिस्टम पर सवाल

शहर में खुले नाले बने मौत का जाल

हसीन दानिश। जन माध्यम
बरेली।
एक खुला नाला और उसमें समा गई एक ज़िंदगी। यह हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की सोई हुई जिम्मेदारी का कड़वा सच है, जिसने एक परिवार से उनका सहारा छीन लिया।

सैटेलाइट बस अड्डे पर हरदोई निवासी ट्रक ड्राइवर तौहीद की खुले नाले में गिरकर हुई दर्दनाक मौत ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब आई जांच रिपोर्ट ने इस मौत को लापरवाही की सीधी देन बता दिया है।

अपर नगरायुक्त की कमेटी ने साफ तौर पर दो जूनियर इंजीनियर, एक सुपरवाइजर, एक सफाई नायक और ठेकेदार को दोषी ठहराया है। रिपोर्ट में ठेकेदार की फर्म को ब्लैकलिस्ट करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। अब नजर नगरायुक्त के फैसले पर टिकी है।

24 मार्च की रात तौहीद बस का इंतजार कर रहा था, तभी अचानक खुले नाले में गिर गया। नाले में तेज बहाव था और वह उसमें फंस गया। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू तो हुआ, लेकिन 30 घंटे बाद उसका शव बाहर निकाला जा सका। सवाल यह है कि इतने व्यस्त बस अड्डे पर नाला बिना ढक्कन और बिना किसी चेतावनी के कैसे खुला पड़ा था?

क्या यह सिर्फ एक चूक थी या जिम्मेदारों की आंखों के सामने हुई अनदेखी?

जांच में साफ हुआ कि साइट निरीक्षण नहीं हुआ, मॉनिटरिंग नहीं हुई और अधूरा काम छोड़ दिया गया। यानी यह हादसा किसी एक की नहीं, पूरे सिस्टम की विफलता है।

एक ओर करोड़ों रुपये “स्मार्ट सिटी” के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुरक्षा तक नहीं दी जा रही। अब पूरे शहर के नालों को ढकने के लिए 500 करोड़ रुपये की जरूरत बताई जा रही है। सवाल उठता है क्या हर बार किसी की जान जाने के बाद ही सिस्टम जागेगा?

सुभाष नगर क्षेत्र में हाल ही में एक और युवक बाइक समेत खुले नाले में गिर गया। गनीमत रही कि इस बार जान बच गई, लेकिन यह घटना भी उसी लापरवाही की कड़ी है।

शहर के कई इलाकों में खुले नाले आज भी मौत का जाल बने हुए हैं। लोग वीडियो बनाकर चेतावनी दे रहे हैं “अब भी नहीं चेते, तो अगली खबर मौत की होगी।”

 

लोगों की मांग साफ है

नालों को तुरंत ढका जाए
दोषियों पर एफआईआर हो
ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए
पीड़ित परिवार को मुआवजा और सहायता मिले

यह सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम की हकीकत है जो कागजों पर चलता है और जमीन पर जान लेता है। अब देखना यह है कि इस बार कार्रवाई सिर्फ फाइलों में सिमटती है या सच में किसी की जिम्मेदारी तय होती है।