ज़हर बनती दवाओं का सच
कमिश्नर की फटकार के बाद नकली दवाओं की जांच में औषधि विभाग की लापरवाही और सच सामने आया।
➡️ औषधि विभाग की जांच पर उठे बड़े सवाल
➡️ कमिश्नर की फटकार से विभाग में हड़कंप
➡️ फर्जी बताए गए बिल असली पाए गए
➡️ जांच करने वालों की ही अब जांच
➡️ चुनिंदा मेडिकल स्टोरों पर ही नोटिस
➡️ अब दोषियों पर कार्रवाई तय
कमिश्नर की गूंजती फटकार ने खोले कई राज
जन माध्यम
बरेली। दवा जीवन का सहारा। लेकिन जब यही दवा नकली निकले, तो यह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि किसी माँ की उम्मीद, किसी बच्चे की ज़िंदगी, किसी बुज़ुर्ग की आखिरी सांस से खिलवाड़ होता है। आगरा से बरेली तक फैले नकली दवाओं के रैकेट ने लोगों की रगों में चिंता दौड़ा दी थी, पर उससे भी ज्यादा भयावह सच यह है कि इस रैकेट की जांच कर रहा औषधि विभाग ही अब संदेह के कटघरे में खड़ा है। आरोप स्पष्ट हैं, एकतरफा कार्रवाई, लीपापोती, और अपने चहेतों को बचाने का खेल।
मामला इतना गंभीर हो गया कि एक कारोबारी की शिकायत ने पूरे विभाग की नींव हिला दी।कमिश्नर भूपेंद्र एस. चौधरी ने बिना देरी किए सहायक आयुक्त औषधि संदीप कुमार को तलब किया। बैठक में उनकी फटकार इतनी तीखी थी कि औषधि विभाग की कुर्सियाँ तक काँप उठीं। कमिश्नर ने साफ कहा
जांच निष्पक्ष नहीं हुई तो कार्रवाई तय है।बस, इसी एक आदेश ने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया।
जो अधिकारी महीनों तक फाइलें पलट पलटकर वक्त काट रहे थे, वे अचानक दौड़ने लगे। शिकायतकर्ता को मिन्टों में ऑफिस ले जाया गया, मान मनौव्वल शुरू हुआ। उसी रात सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर उर्मिला वर्मा बहेड़ी के जगदीश मेडिकल स्टोर पर पहुंचीं वहीं, जहाँ आगरा की संदिग्ध खेप आई थी।और यहीं पर सच्चाई ने करवट ली। जिन लखनऊ एजेंसी के बिलों को फर्जी बता कर लाइसेंस निलंबित किया गया था, वही बिल इस जांच में पूरी तरह सही पाए गए। यह खुलासा किसी से सवाल नहीं पूछता यह सीधे औषधि विभाग की नीयत पर प्रश्नचिह्न लगा देता है।
दवा कारोबारियों में फूट पड़ चुकी है। 20 मेडिकल स्टोरों पर दवाएं भेजी गई थीं, नोटिस जारी हुए सिर्फ चुनिंदा को। चार महीने बीत गए, कार्रवाई आगे बढ़ी ही नहीं। आरोप साफ हैं,सेटिंग वालों को बचाया गया, कमजोरों को निशाना बनाया गया। कमिश्नर की एंट्री के बाद अब कहानी बदल चुकी है। उन्होंने साफ कहां की दोषी बचेंगे नहीं। निर्दोष को छुआ भी नहीं जाएगा।यह लड़ाई सिर्फ नकली दवाओं के खिलाफ नहीं,यह लड़ाई है उस भरोसे के लिए, जो हर मरीज अपनी दवा की पहली गोली निगलते वक्त भगवान की तरह डॉक्टर और सिस्टम पर करता है।और उम्मीद है इस बार सच दवा की तरह असर करेगा, धीमा नहीं सीधा और तीखा।