नरेश चंद्र गंगवार की 12 वर्षों की दंडवत यात्रा
सेंथल के नरेश चंद्र गंगवार ने 12 वर्षों में 7500 किलोमीटर की दंडवत यात्रा पूरी की। उनका उद्देश्य गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाना, समाज में शाकाहारी और नशामुक्त संस्कार बढ़ाना और सनातन धर्म का उत्थान करना है।
➡️ 12 वर्षों में 7500 किलोमीटर की दंडवत यात्रा पूरी
➡️ गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की पहल
➡️ शाकाहारी और नशामुक्त समाज का निर्माण
➡️ भारत के प्रमुख धार्मिक स्थल: वैष्णोदेवी, अमरनाथ, मथुरा, अयोध्या, हरिद्वार, ऋषिकेश
➡️ समाज कल्याण और सनातन धर्म के उत्थान का प्रेरणादायक प्रयास
7500 किलोमीटर की यात्रा पूरी, गाय को राष्ट्र माता का दर्जा और मानवता के कल्याण की कामना के लिए अनोखी पहल
सरफराज़ खान/ जन माध्यम
सेंथल,बरेली। सेंथल के नरेश चंद्र गंगवार ने सनातन धर्म और मानव कल्याण के उद्देश्य से अनोखी दंडवत यात्रा शुरू की है। नरेश अपने परिवार के साथ पत्नी सुमित्रा देवी और पुत्र के साथ भारत के चार धाम, बारह ज्योतिर्लिंग, इक्यावन शक्तिपीठ और प्रमुख देव स्थलों का भ्रमण कर रहे हैं। उनका उद्देश्य गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाना, शाकाहारी और नशामुक्त समाज का निर्माण करना तथा सनातन धर्म का उत्थान करना है।
31 महीने पहले 1 मई 2023 से आरंभ हुई इस यात्रा में नरेश गंगवार ने अब तक दस राज्यों के प्रमुख देवस्थलों में माथा टेककर आशीर्वाद लिया है। वर्तमान में ग्यारहवें राज्य महाराष्ट्र के सम्भाजी नगर में उनकी यात्रा पहुंच चुकी है। इस दौरान उन्होंने हर स्थान पर पीठ के बल घिसटते हुए दंडवत यात्रा कर सनातन धर्म और समाज कल्याण की कामना की। नरेश ने बताया कि उनके इस अनोखे प्रयास का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ प्राप्त करना नहीं है। वे सभी लोगों के कल्याण की कामना करते हुए मानवता की ओर बढ़ते दानवी प्रवृत्तियों को सद्बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर देवस्थलों पर जाकर संपत्ति, पद और संतान की कामना करते हैं, लेकिन उनका लक्ष्य समाज और धर्म की उन्नति है।
इस बारह वर्षीय दंडवत यात्रा के दौरान नरेश गंगवार पूरे भारत के प्रमुख धार्मिक स्थल, जैसे वैष्णोदेवी, अमरनाथ, मथुरा, अयोध्या, गोरखनाथ मंदिर, पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल, हरिद्वार, ऋषिकेश और चंडी देवी में दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने 7500 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर दस राज्यों में माथा टेककर आशीर्वाद लिया है। इस अनोखी यात्रा को जारी रखते हुए उनका प्रयास सनातन संस्कृति और समाज के कल्याण का प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।