एसपी ट्रैफिक की नई उम्मीद

एसपी ट्रैफिक बरेली ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर सड़क हादसों की वैज्ञानिक मैपिंग की अनोखी पहल शुरू की, पांच थाना क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट।

एसपी ट्रैफिक की नई उम्मीद
HIGHLIGHTS:

➡️ एसपी ट्रैफिक मोहम्मद अकमल खान की नेतृत्व में अनोखी सड़क सुरक्षा पहल
➡️ आईआईटी मद्रास ने तैयार किया FPS–Field Perception Survey ऐप
➡️ हादसे वाले हर मोड़, चौराहे और यू-टर्न की वैज्ञानिक मैपिंग
➡️ गलत यू-टर्न, टूटे डिवाइडर, गायब साइनबोर्ड जैसी कमियों की पहचान
➡️ पिछले तीन साल के सभी हॉटस्पॉट ऐप में चिन्हित होंगे
➡️ बहेड़ी, दोरनिया, फतेहगंज पश्चिमी, फरीदपुर और भोजीपुरा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू
➡️ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पुलिस टीम को प्रशिक्षण
➡️ लक्ष्य—बरेली को कम से कम एक्सीडेंट ज़ोन बनाना

आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर बरेली को कम से कम एक्सीडेंट ज़ोन बनाने की अनोखी पहल

डेस्क/ जन माध्यम 
बरेली।
ट्रैफिक पुलिस ने एक नई उम्मीद, नई सोच और नए संकल्प के साथ सड़क सुरक्षा की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। शहर की सड़कों पर बढ़ते हादसों ने न जाने कितने परिवार उजाड़े, कितनी माताओं की गोद सूनी की और कितने बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेल दिया। इन्हीं पीड़ाओं और हादसों की तड़प को महसूस करते हुए उच्च अधिकारियों के आदेश पर एसपी ट्रैफिक मोहम्मद अकमल खान ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जो सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि जन जीवन की रक्षा का संकल्प है।
हादसों पर रोक लगाने के लिए एसपी ट्रैफिक ने तकनीक की ओर हाथ बढ़ाया और सीधे आईआईटी मद्रास जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से संपर्क किया। उनकी इस संवेदनशील पहल को देखते हुए आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों ने एक विशेष मोबाइल एप तैयार किया है। एफपीएस फील्ड परसेप्शन सर्वे इस ऐप की खासियत यह है कि यह बरेली के हर उस मोड़, चौराहे और सड़क के टुकड़े को चिन्हित करेगा, जहां हादसे बार बार होते हैं। ऐप न सिर्फ दुर्घटना स्थलों को पहचानेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि आखिर हादसे क्यों हो रहे हैं कहीं सड़क पर गलत दिशा में मुड़ाव तो नहीं? कहीं यू-टर्न गलत जगह बनाया गया है? ट्रैफिक साइन गायब तो नहीं? डिवाइडर क्षतिग्रस्त हैं या पैचवर्क अधूरा है? सड़क किनारे पेड़ों या झाड़ियों की वजह से दृश्यता कम तो नहीं? लाल बत्ती ठीक से काम कर रही है या नहीं? रात में रोशनी पर्याप्त है या नहीं?
और रोड पर ठीक से पत्तियां चिह्न या डायरेक्शन बोर्ड ठीक है या नहीं?
पिछले तीन सालों में जहां जहां हादसे सबसे ज़्यादा हुए, ऐप उन सभी जगहों को हॉटस्पॉट  के रूप में चिन्हित करेगा। इसी मिशन को आगे बढ़ाते हुए एसपी ट्रैफिक ने बरेली के पांच प्रमुख थाना क्षेत्रों  बहेड़ी, दोरनिया, फतेहगंज पश्चिमी, फरीदपुर और भोजीपुरा   को इस परियोजना में सबसे पहले शामिल किया है। एसपी ट्रैफिक ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए  इन सभी थाना क्षेत्रों के प्रभारी, पुलिस टीम को  आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों ने बताया और  मिलकर इस योजना को धरातल पर उतारने की रणनीति बनाई। एसपी ट्रैफिक का सपना है कि बरेली पूरी तरह कम से कम एक्सीडेंट ज़ोन बन जाए। यह कोई सामान्य लक्ष्य नहीं यह एक ऐसी मुहिम है जो शहर और पूरे जिले में सड़क सुरक्षा को नई परिभाषा देगी। उनके अनुसार, जैसे ही सभी पॉइंट्स का ऑडिट इस ऐप के माध्यम से पूरा होगा, हर चौराहे की कमियां, हर मोड़ की खामियां और हर सड़क की तकनीकी कमी दूर की जाएगी।
यह सिर्फ तकनीकी प्रोजेक्ट नहीं
यह ऐसी मुहिम है जो हर उस ज़िंदगी को बचाएगी जो हादसों के कारण समय से पहले खत्म हो जाती है। यह पहल साबित करती है कि पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा के लिए भी पूरी संवेदनशीलता से काम कर सकती है। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर एसपी ट्रैफिक की यह कोशिश न सिर्फ बरेली की सड़कों को सुरक्षित बनाएगी, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बनकर उभरेगी  एक नई ऊर्जा, एक नया कीर्तिमान, और सड़क सुरक्षा का नया अध्याय होगा।