हौसले की उड़ान जिसने हालातों को हराया
80% दिव्यांग शबीह अब्बास नकवी ने व्हीलचेयर पर रहते हुए MA किया, सरकारी नौकरी ली, गरीब बच्चों के लिए स्कूल खोला और समाज को प्रेरणा दी।
➡️ 80% दिव्यांग – फिर भी MA और सरकारी नौकरी
➡️ रोज 50 किमी व्हीलचेयर से पढ़ाई की
➡️ गरीब-अनाथ बच्चों के लिए फ्री स्कूल चलाते हैं
➡️ 2008 में UP सरकार ने दिया उत्कृष्ट संस्था अवार्ड
➡️ कोरोना में ऑक्सीजन-पैसा-राशन बांटा
➡️ शायर, लेखक, वक्ता – हर क्षेत्र में छाए
80% दिव्यांग होते हुए भी सय्यद शबीह अब्बास नकवी ने शिक्षा, सेवा और संघर्ष से समाज में लिखी नई रोशनी की कहानी
जन माध्यम
सैंथल।बरेली।सैंथल,जन्म से ही 80% शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के बावजूद सय्यद शबीह अब्बास नकवी ने अपने जीवन को संघर्ष और सेवा का प्रतीक बना दिया है। व्हीलचेयर पर रहते हुए उन्होंने न केवल उच्च शिक्षा हासिल की और सरकारी नौकरी प्राप्त की, बल्कि समाज को शिक्षित करने का बीड़ा उठाकर अनगिनत बच्चों के जीवन में उजाला फैलाया। शबीह अब्बास नकवी ने यूनिटी चिल्ड्रेन एकेडमी सिरसी की स्थापना की, जहाँ निर्धन, अनाथ और दिव्यांग बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है। उनके इस उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2008 में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संस्था को उत्कृष्ट संस्था अवार्ड से सम्मानित किया गया। उनकी शैक्षणिक यात्रा संघर्षपूर्ण रही। उन्होंने 1993 में हाई स्कूल में सर्वोत्तम स्थान प्राप्त किया, विज्ञान कक्षाओं की कमी के बावजूद प्रतिदिन 20 किलोमीटर की दूरी तय कर इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया और आगे की पढ़ाई के लिए प्रतिदिन 50 किलोमीटर यात्रा कर मुरादाबाद से बी.एस.सी.एम.ए. इकॉनॉमिक्स और एम.ए. पॉलिटिकल साइंस की डिग्रियाँ हासिल की। वर्तमान में वे रक्षा लेखा विभाग, बरेली में ऑडिटर के पद पर 15 वर्षों से ईमानदारी से सेवाएं दे रहे हैं। समाज सेवा में उनका योगदान अत्यंत सराहनीय है। कोरोना काल में उन्होंने अपने वेतन का महत्वपूर्ण हिस्सा प्रधानमंत्री राहत कोष और पीएम केयर फंड में दान किया, जरूरतमंदों को राशन और नकद सहायता उपलब्ध कराई, और मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था की। सर्व शिक्षा अभियान और पल्स पोलियो अभियान में भी उन्होंने नि:शुल्क भागीदारी निभाई। एक कुशल वक्ता, लेखक और शायर के रूप में वे अपने विचारों को समाज तक पहुँचाते हैं। उनके लेख अनेक पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं और वह मुशायरों में अपनी कविताओं से लोगों के दिलों को छूते हैं। 80% दिव्यांग होने के बावजूद, उन्होंने शिक्षा, सेवा और समाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। वे देश के दिव्यांगजनों को प्रेरित करते हैं, शिक्षा प्राप्त करें, मेहनत करें, सफलता आपके कदम चूमेगी और आप समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकेंगे।
सच्ची प्रेरणा, दृढ़ संकल्प और सेवा भाव का संगम, यही है सय्यद शबीह अब्बास नकवी की जिंदा मिसाल है।