जब कानून बना महिलाओं की ढाल
बरेली के क्लासिक कॉलेज ऑफ लॉ में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम, 2013 पर छात्राओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित। महिला सुरक्षा, सम्मान और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी साझा की गई।
➡️ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम, 2013 पर जागरूकता
➡️ छात्राओं ने अपने विचार रखे और आवाज उठाई
➡️ उत्पीड़न केवल शारीरिक नहीं, मानसिक और ऑनलाइन भी
➡️ शिकायत करने वाली महिला की पहचान पूरी तरह गोपनीय
➡️ हेल्पलाइन नंबर: 1090, 181, 1098, 101, 1076
क्लासिक कॉलेज ऑफ लॉ, बरेली में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न कानून पर जागरूकता कार्यक्रम, छात्राओं ने उठाई आवाज
डेस्क/ जन माध्यम
बरेली। समाज तब मजबूत बनता है, जब उसकी आधी आबादी सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे। जब महिलाएं बिना डर, बिना संकोच अपने कार्यस्थल पर कदम रख सकें, तभी विकास का सपना साकार होता है। इसी सोच को सशक्त करने के उद्देश्य से दिनांक 17 दिसम्बर को क्लासिक कॉलेज ऑफ लॉ, बरेली में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में कार्यस्थल पर होने वाले यौन अपराध एवं महिलाओं के यौन उत्पीड़न रोकथाम, निषेध एवं निवारण अधिनियम, 2013 पर आधारित एक प्रभावशाली जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में छात्राओं अनन्या शंखधार एवं स्वाती शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि यह महिला के आत्मसम्मान, मानसिक शांति और सामाजिक गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, रोजगार, प्रशासन और तकनीक हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्हें असुरक्षा और उत्पीड़न जैसी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यौन उत्पीड़न केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि अशोभनीय टिप्पणियाँ, अनुचित इशारे, मानसिक दबाव, ऑनलाइन उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग भी इसके दायरे में आते हैं, जो महिला के आत्मविश्वास को भीतर से तोड़ देते हैं। कार्यक्रम में अधिनियम 2013 के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया गया कि यह कानून महिलाओं को सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण प्रदान करने की गारंटी देता है। इसके अंतर्गत शिकायत करने वाली महिला की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है और उसे न्याय दिलाने की स्पष्ट व्यवस्था मौजूद है।
कार्यक्रम के समापन पर एन.एस.एस. प्रभारी मोहम्मद हस्सान रज़ा ख़ान ने अपने उद्बोधन में कहा, “सशक्त नारी ही सशक्त समाज की नींव है।” उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे स्वयं जागरूक बनें और समाज में महिला सुरक्षा, सम्मान और समानता की अलख जगाएँ। साथ ही उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा हेतु उपलब्ध हेल्पलाइन नंबरों 1090, 181, 1098, 101 एवं 1076 की जानकारी भी साझा की।