चिराग मियां की मजार पर चादरपोशी को उमड़ा आस्था का सैलाब
सैंथल में चिराग मियां की मजार पर आयोजित उर्स मेले में सुन्नी जामा मस्जिद से कारवां निकला। अकीदतमंदों ने चादरपोशी, फातिहा ख्वानी की और जलसे में उलमा की तकरीरें हुईं।
➡️ सुन्नी जामा मस्जिद से नमाज के बाद कारवां रवाना
➡️ चिराग मियां की मजार पर अकीदत के साथ चादरपोशी
➡️ फातिहा ख्वानी कर मांगी गई दुआएं
➡️ उर्स मेले में उलमा और हुफ्फाज की तकरीरें
➡️ हजरत चिराग अली शाह मियां की तालीम पर चलने की अपील
➡️ मजार परिसर में उमड़ी अकीदतमंदों की भारी भीड़
➡️ माहौल रहा रूहानियत और अमन से सराबोर
जन माध्यम।
सरफराज़ खान। सैंथल (बरेली)।
कस्बे की सुन्नी जामा मस्जिद से नमाज अदा करने के बाद अकीदतमंदों का एक बड़ा कारवां चिराग मियां की मजार पर आयोजित उर्स मेले में चादरपोशी के लिए रवाना हुआ। मस्जिद के इमाम मौलाना खुर्शीद आलम मिस्बाही की क़यादत में पहुंचे इस काफिले ने मजार पर पहुंचकर पूरे अदब और एहतराम के साथ चादरपोशी और फातिहा ख्वानी की रस्म अदा की।
चादरपोशी के बाद मजार परिसर में एक जलसे का आयोजन किया गया, जिसमें अनेक आलिम और हाफिज-ए-कुरआन ने तकरीरें पेश कीं। वक्ताओं ने हजरत चिराग अली शाह मियां की जिंदगी, उनकी करामात और तालीम पर रौशनी डालते हुए कहा कि औलिया-ए-किराम की तालीम इंसानियत, अमन और भाईचारे का पैगाम देती है।
मौलाना खुर्शीद आलम मिस्बाही ने अपनी तकरीर में कहा कि हजरत चिराग अली शाह मियां ने पूरी जिंदगी अल्लाह की इबादत और इंसानों की खिदमत में गुजारी। उन्होंने आमजन से मियां जी के नक्शे-कदम पर चलने और समाज में मोहब्बत व भाईचारे को मजबूत करने की अपील की।
जलसे की निज़ामत हाफिज इरशाद अजहरी वाहिदी ने की। उन्होंने मियां जी से अपनी अकीदत का इजहार करते हुए कहा कि औलिया की दरगाहें इंसान को सब्र, यकीन और सच्चाई का रास्ता दिखाती हैं।
एडवोकेट रियाज अहमद ने औलिया की शान बयान करते हुए कहा कि वालियों के आस्तानों से जो सच्चे दिल से मांगा जाता है, वह जरूर मिलता है। उर्स के मौके पर मजार परिसर में अकीदतमंदों की भारी भीड़ देखी गई और माहौल पूरी तरह रूहानियत से सराबोर रहा।