ज्ञान की रोशनी में निखरी खाकी

बरेली के महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में 780 पुलिसकर्मियों को डिजिटल साक्ष्य, आधुनिक न्याय प्रणाली और नए आपराधिक कानूनों पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

ज्ञान की रोशनी में निखरी खाकी
HIGHLIGHTS:

780 पुलिसकर्मी रिफ्रेशर कोर्स में शामिल
डिजिटल साक्ष्य और चेन ऑफ कस्टडी पर जोर
नए आपराधिक कानूनों पर विस्तृत चर्चा

जन माध्यम 
बरेली।
खाकी जब किताबों के बीच बैठती है, तो समाज को भरोसा मिलता है कि न्याय की जड़ें और मजबूत होने जा रही हैं। शनिवार को महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय का ऑडिटोरियम कुछ अलग ही ऊर्जा से भरा था। यहां भाषणों से ज्यादा सीखने की ललक थी, औपचारिकताओं से ज्यादा जिम्मेदारी का एहसास था।

पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश के निर्देश पर आयोजित इस एक दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स में बरेली जोन के नौ जनपदों के 181 थानों से आए पैरोकारों और कोर्ट मोहर्रिरों ने हिस्सा लिया। कुल 780 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी यह बता रही थी कि खाकी अब केवल कानून लागू करने वाली ताकत नहीं, बल्कि कानून को गहराई से समझने वाली सजग व्यवस्था बन रही है। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा डिजिटल साक्ष्य मजबूत होंगे, तो अपराधी बच नहीं पाएंगे।

उनके इस कथन में आधुनिक पुलिसिंग का सार छिपा था। आज अपराध की दुनिया तकनीक से लैस है, तो पुलिस को भी तकनीक की धार से ही जवाब देना होगा। पहले सत्र में संयुक्त निदेशक अभियोजन अच्छेलाल यादव ने नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम पर गहन चर्चा हुई। पैरोकारों और कोर्ट मोहर्रिरों को समझाया गया कि वे न्याय प्रक्रिया की रीढ़ हैं। एक सही दस्तावेज, एक सुरक्षित साक्ष्य और एक समयबद्ध कार्रवाई अदालत में सच को मजबूती देती है।

द्वितीय और तृतीय सत्र में सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के आदेशों की समीक्षा के साथ चेन ऑफ कस्टडी, ई-समन, आईसीजेएस, सीसीटीएनएस और ई-मालखाना जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया। सवाल-जवाब के दौरान मैदानी अनुभवों की खुली चर्चा हुई यह बताता है कि पुलिस तंत्र खुद को सुधारने के लिए तैयार है। कार्यक्रम में एडीजी रमित शर्मा, डीआईजी अजय कुमार साहनी, और एसएसपी अनुराग आर्य सहित वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने इस पहल को और मजबूती दी।

यह आयोजन केवल प्रशिक्षण नहीं था, बल्कि आत्ममंथन था खाकी का स्वयं से वादा कि वह समय के साथ चलेगी, तकनीक को अपनाएगी और न्याय को और सशक्त बनाएगी। जब पुलिस अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए खुद को प्रशिक्षित करती है, तो अदालत में सच्चाई और समाज में विश्वास दोनों मजबूत होते हैं। उस दिन रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने देखा ज्ञान और खाकी का यह संगम आने वाले कल को ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।