बिजली आरसी का करंट कलेक्ट्रेट तक
बरेली में पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट के सरकारी आवास पर 22.73 लाख रुपये की बिजली आरसी जारी होने से कलेक्ट्रेट में खलबली। वर्टिकल द्वितीय कार्यालय की कार्यशैली पर उठे सवाल, बाद में आरसी वापस लेने की पहल।
➡️ 22.73 लाख रुपये की बिजली आरसी जारी
➡️ कलेक्ट्रेट में मचा हड़कंप
➡️ वर्टिकल द्वितीय कार्यालय की कार्यशैली पर सवाल
जन माध्यम
बरेली। एडीएम कंपाउंड एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह प्रशासनिक संवेदनशीलता नहीं, बल्कि बिजली विभाग की चौंकाने वाली लापरवाही है। पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के सरकारी आवास पर 22 लाख 73 हजार 932 रुपये का बिजली बिल बकाया दिखाते हुए रिकवरी सर्टिफिकेट आरसी जारी कर दी गई। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक तकनीकी गलती थी, या फिर विभागीय कार्यशैली की गंभीर खामी?
पूरा मामला अधिशासी अभियंता वाणिज्य वर्टिकल द्वितीय सूर्य कुमार के कार्यालय से जुड़ा बताया जा रहा है। रामपुर बाग स्थित कॉमर्शियल 2 वर्टिकल कार्यालय से यह मांगपत्र वसूली के लिए सीधे प्रशासन को भेज दिया गया। बिना तथ्यों की ठोस जांच, बिना यह देखे कि संबंधित आवास सरकारी है और उस पर आरसी जारी करने की प्रक्रिया क्या होनी चाहिए सीधे 22 लाख से अधिक की वसूली का आदेश थमा दिया गया। जैसे ही यह आरसी कलेक्ट्रेट पहुंची, प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई। जिस आवास पर यह बकाया दर्शाया गया, वह पहले ही विवादों में रह चुका है। ऐसे में इतनी बड़ी रकम की आरसी जारी होना महज कागजी चूक नहीं माना जा सकता।
अधिकारियों ने जब कड़ी नाराजगी जताई, तब अधिशासी अभियंता सूर्य कुमार की ओर से आरसी वापस लेने का पत्र लिखा गया। सवाल उठता है,अगर वाकई बकाया सही था तो वापसी क्यों? और अगर बकाया गलत था तो इतनी बड़ी रकम की आरसी जारी कैसे हो गई? विभागीय नियम स्पष्ट कहते हैं कि सरकारी आवासों और अधिकारियों से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी बरती जाती है। ऐसे मामलों में सीधे आरसी जारी करना सामान्य प्रक्रिया नहीं है। फिर यह जल्दबाजी क्यों? क्या संबंधित खातों का मिलान किया गया था? क्या मीटर रीडिंग और बिलिंग का सत्यापन हुआ था? या फिर यह सब बिना गहन जांच के फाइलों के भरोसे कर दिया गया? और सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आरसी कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद मामले को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए फाइलों को गोपनीय रखने के निर्देश दिए गए। यदि सब कुछ नियमसम्मत था तो गोपनीयता की जरूरत क्यों पड़ी? यह पूरा घटनाक्रम बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अधिशासी अभियंता सूर्य कुमार के कार्यालय की इस कार्रवाई ने न सिर्फ प्रशासन को असहज स्थिति में डाला, बल्कि विभाग की साख पर भी आंच पहुंचाई है। एक सरकारी आवास पर 22 लाख रुपये का बकाया दिखाना और फिर दबाव पड़ते ही आरसी वापस लेने का आग्रह करना यह दर्शाता है कि या तो सिस्टम में गंभीर त्रुटि है या जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी के प्रति सजग नहीं हैं। अब जरूरत है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो। यह तय होना चाहिए कि गलती तकनीकी थी, प्रक्रियागत थी या लापरवाही का परिणाम। क्योंकि जब विभाग खुद ही अपने आंकड़ों पर खड़ा नहीं रह पाता, तो आम उपभोक्ता से पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद कैसे की जा सकती है?