रमज़ान में बरसती हैं खास रहमतें

बरेली उर्दू क्लब की अध्यक्ष ज़ैनब फ़ातिमा ने रमज़ान माह में रोज़ों की फ़ज़ीलत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महीना रहमत, मग़फ़िरत और निजात का पैगाम देता है।

रमज़ान में बरसती हैं खास रहमतें
HIGHLIGHTS:

रोज़ा खुदा की मोहब्बत का इज़हार
एक नेकी का सवाब सत्तर गुना तक
रमज़ान का पहला हिस्सा रहमत, दूसरा मग़फ़िरत

जन माध्यम

बरेली। रमज़ान माह के आगाज़ के साथ ही शहर में इबादत और रूहानियत का माहौल गहरा गया है। इसी क्रम में बरेली उर्दू क्लब की अध्यक्ष ज़ैनब फ़ातिमा ने रोज़ों की अहमियत और उसकी फ़ज़ीलत पर रोशनी डालते हुए कहा कि रोज़ा रखना खुदा की मोहब्बत का इज़हार है और सहरी करना नबी की सुन्नत है।

उन्होंने कहा कि रोज़ा रखने के लिए जिस्मानी ताकत से ज्यादा साफ नियत की जरूरत होती है। रोज़ा इंसान को बुराइयों से बचाने वाली ढाल और किला है। रमज़ान के मुकद्दस महीने में एक नेकी का सवाब सत्तर गुना तक बढ़ा दिया जाता है और रोज़ेदारों पर खुदा की खास रहमतें बरसती हैं।

ज़ैनब फ़ातिमा ने कहा कि रमज़ान मुस्लिम समुदाय के लिए साल का सबसे अफज़ल महीना होता है। इस महीने में रोज़ा, नमाज़, कुरआन की तिलावत और दूसरी इबादतों के जरिए बंदा अपने रब के करीब होता है। उन्होंने बताया कि रमज़ान का पहला हिस्सा रहमत, दूसरा हिस्सा मग़फ़िरत और तीसरा हिस्सा जहन्नुम से निजात का होता है।

उन्होंने आगे कहा कि तीस दिनों के रोज़े हर मोमिन पर फर्ज हैं और इन्हें पूरी अकीदत व खलूस के साथ अदा करना चाहिए। रमज़ान हमें सब्र, शुक्र और इंसानियत का पैगाम देता है। यह महीना अपने अंदर आत्मशुद्धि और सामाजिक भाईचारे का संदेश समेटे हुए है।

ज़ैनब फ़ातिमा ने सभी रोज़ेदारों से अपील की कि वे इबादत के साथ-साथ जरूरतमंदों की मदद करें, क्योंकि यही रमज़ान की असली रूह है।