खोया था मोबाइल, मिला भरोसा

बरेली पुलिस ने 410 गुम मोबाइल बरामद कर लोगों को लौटाए, 80 लाख की रिकवरी से बढ़ा भरोसा, एसएसपी अनुराग आर्य की पहल।

खोया था मोबाइल, मिला भरोसा
HIGHLIGHTS:

मार्च में 410 मोबाइल फोन बरामद

करीब 80 लाख रुपये की रिकवरी

हाईटेक ट्रैकिंग से मिली सफलता

पुलिस पर बढ़ा लोगों का भरोसा

जन माध्यम

बरेली। कभी मोबाइल खो जाना सिर्फ एक सामान खोना नहीं होता, बल्कि उससे जुड़ी यादें, जरूरी दस्तावेज और निजी दुनिया भी जैसे हाथ से फिसल जाती है। लेकिन जिले की पुलिस ने इस दर्द को समझा और उसे मिशन में बदल दिया। नतीजा मार्च माह में 410 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों तक रविवार को पहुंचा दिए गए। करीब 80 लाख रुपये कीमत की इस बरामदगी ने न केवल लोगों का खोया सामान लौटाया, बल्कि पुलिस पर भरोसा भी कई गुना बढ़ा दिया। रिजर्व पुलिस लाइन्स स्थित रविन्द्रालय में जब लोगों को उनके मोबाइल वापस मिले, तो वहां सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावनाओं का संगम दिखाई दिया। किसी के चेहरे पर सुकून था, तो किसी की आंखों में राहत के आंसू। यह दृश्य साफ बता रहा था कि पुलिस अब सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीदों की भी रखवाली कर रही है। इस पूरी सफलता के पीछे हैं एसएसपी अनुराग आर्य, जिनकी सोच ने इस अभियान को एक नई दिशा दी। उनका साफ संदेश है,जनता की समस्या छोटी हो या बड़ी, समाधान हर हाल में होना चाहिए। इसी सोच के साथ हर महीने गुम हुए मोबाइल फोनों की बरामदगी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की खासियत है इसका हाईटेक अप्रोच। सीईआईआर पोर्टल, सर्विलांस सिस्टम और साइबर टीम की सटीक रणनीति ने उन मोबाइल फोनों को भी ढूंढ निकाला, जो दूर दराज के इलाकों में सक्रिय हो चुके थे। तकनीक और पुलिसिंग के इस संगम ने बरेली को प्रदेश में अलग पहचान दिलाई है। अगर जमीनी स्तर की बात करें तो इज्जतनगर थाना 32 मोबाइल बरामद कर अव्वल रहा, जबकि साइबर सेल ने 30 मोबाइल रिकवर कर अपनी दक्षता साबित की। बहेड़ी, बारादरी, प्रेमनगर, कोतवाली और फरीदपुर जैसे थानों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। यह दिखाता है कि पूरी फोर्स एक लक्ष्य के साथ काम कर रही। एसएसपी अनुराग आर्य ने इस उत्कृष्ट कार्य के लिए 12 थानों की साइबर टीम को 2000 रुपये नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। यह सम्मान सिर्फ इनाम नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों के मनोबल को नई उड़ान देने का जरिया है। पुलिस की यह मुहिम केवल एक महीने की उपलब्धि तक सीमित नहीं है। वर्ष 2025 से अब तक कुल 4455 मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं, जिनकी कीमत करीब 8.8 करोड़ रुपये है। यह आंकड़ा बताता है कि यह अभियान एक निरंतर चलने वाला जनसेवा का मिशन बन चुका है। आज के दौर में मोबाइल व्यक्ति की पहचान, कामकाज और निजी जीवन का अहम हिस्सा है। ऐसे में उसका खो जाना किसी बड़े संकट से कम नहीं होता। बरेली पुलिस ने इस सच्चाई को समझते हुए जिस गंभीरता से काम किया है, वह उसे प्रदेश में नंबर वन की कतार में खड़ा करता है। एसएसपी अनुराग आर्य का नेतृत्व इस सफलता की असली ताकत है। उनकी कार्यशैली में सख्ती भी है और संवेदनशीलता भी। यही संतुलन बरेली पुलिस को खास बनाता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि यह सिर्फ मोबाइल बरामदगी की कहानी नहीं, बल्कि विश्वास की वापसी की कहानी है एक ऐसा विश्वास, जो अब बरेली की सड़कों से लेकर लोगों के दिलों तक मजबूती से कायम हो चुका है।