भीड़ में वार,खातों पर प्रहार गिरोह गिरफ्तार
बरेली में साइबर क्राइम टीम ने अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 45 चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए। भीड़ में मोबाइल चोरी कर यूपीआई के जरिए खातों से रकम उड़ाने वाला नेटवर्क बेनकाब, चार शातिर गिरफ्तार।
45 चोरी के मोबाइल के साथ चार गिरफ्तार
भीड़ में मोबाइल चोरी, यूपीआई से खाते खाली
एनसीआरपी जांच से मिला अहम सुराग
कई राज्यों में फैला था साइबर नेटवर्क
जन माध्यम
बरेली। भीड़ में जेब से निकला मोबाइल और कुछ ही मिनटों में खाली हो जाता बैंक खाता। यही था उस अंतर्राज्यीय गिरोह का खतरनाक खेल, जिसका पर्दाफाश बरेली पुलिस ने कर दिया। बुधवार को थाना साइबर क्राइम टीम ने तकनीक और सतर्कता के दम पर चार शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार कर 45 चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी कीमत लगभग 15 लाख रुपये आंकी गई है। पूरे मामले की शुरुआत एनसीआरपी संख्या 33101260005277 की जांच से हुई। पीड़ित के बैंक खाते से यूपीआई के माध्यम से निकाली गई रकम के तकनीकी विश्लेषण में एक संदिग्ध मोबाइल नंबर और आईपी का सुराग मिला, जिसकी लोकेशन रेलवे जंक्शन बरेली के आसपास पाई गई। पुलिस ने बिना देरी किए मौके पर घेराबंदी की और गिरोह के चार सदस्यों को दबोच लिया।
गिरफ्तार अभियुक्तों में सागर कुमार और ऋषि कुमार साहिबगंज, झारखंड, सुमित कुमार राजमहल, झारखंड तथा आकाश नुनईया आसनसोल, पश्चिम बंगाल शामिल हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह भीड़भाड़ वाले बाजारों, स्टेशनों और सार्वजनिक स्थलों पर मोबाइल चोरी करता था। इसके बाद मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप और यूपीआई का दुरुपयोग कर पीड़ितों के खातों से रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर देता था। चोरी किए गए मोबाइल आगे झारखंड और पश्चिम बंगाल के अन्य साइबर अपराधियों को सौंप दिए जाते थे, ताकि अपराध की कड़ी लंबी और जटिल बनी रहे। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य कई राज्यों में सक्रिय रहे हैं और इनके खिलाफ पूर्व में भी विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित अन्य स्थानों पर चोरी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में इनकी संलिप्तता रही है। यह साफ है कि यह गिरोह योजनाबद्ध तरीके से काम करता था और लगातार शहर बदलकर वारदात को अंजाम देता था। इस पूरी कार्रवाई में पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश, अपर पुलिस महानिदेशक बरेली जोन, पुलिस उपमहानिरीक्षक बरेली परिक्षेत्र तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरेली के निर्देशों के अनुरूप साइबर अपराध पर सख्त रुख अपनाया गया। पुलिस अधीक्षक अपराध और क्षेत्राधिकारी अपराध के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सटीक कार्रवाई की। टीम में उपनिरीक्षक गुरमीत तोमर, अंकित सिंह चौहान, शिवम सक्सैना, कपिल राघव सहित अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका अहम रही। यह कार्रवाई केवल 45 मोबाइल की बरामदगी नहीं, बल्कि एक बड़े साइबर नेटवर्क पर चोट है। पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि डिजिटल अपराधियों के लिए अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं।
आम नागरिकों के लिए भी यह चेतावनी है,मोबाइल आपकी निजी दुनिया की चाबी है। इसे सुरक्षित रखें, संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें। जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है, और सतर्क नागरिक ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे मजबूत