पे-आउट बढ़ाने की मांग पर स्विग्गी राइडर्स का प्रदर्शन, बोले- मेहनत का उचित हक चाहिए
बरेली के सील चौराहा पर स्विग्गी राइडर्स ने पे-आउट बढ़ाने और भुगतान व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। राइडर्स ने कंपनी पर छह महीने से केवल आश्वासन देने का आरोप लगाया।
पे-आउट बढ़ाने और भुगतान व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर स्विग्गी राइडर्स का प्रदर्शन।
राइडर्स का आरोप, छह महीने से कंपनी केवल आश्वासन दे रही है।
कैंसिल ऑर्डर, मल्टी-ऑर्डर और इंसेंटिव नीति में पारदर्शिता की मांग उठाई।
जन माध्यम । बरेली
बाइक हमारी है, पेट्रोल हमारा है, गाड़ी की सर्विस हम कराते हैं, हादसा होने का जोखिम भी हमारा है फिर हमारी मेहनत का दाम तय करने वाली कंपनी कौन होती है?
यह सवाल रविवार को बरेली के सील चौराहा पर हड़ताल पर बैठे स्विग्गी राइडर्स के चेहरे पर साफ दिखाई दिया। अपनी मांगों को लेकर एकजुट हुए राइडर्स ने कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कहा कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, उन्हें उनकी मेहनत का उचित हक चाहिए।राइडर्स का आरोप है कि पिछले छह महीनों से उन्हें लगातार पे-आउट बढ़ाने का भरोसा दिया जाता रहा, लेकिन आज तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। उनका कहना है कि इससे पहले भी वे हड़ताल पर गए थे। उस समय कंपनी की ओर से सात दिन के भीतर पे-आउट बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन छह महीने बीत जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
प्रदर्शन कर रहे राइडर्स का कहना है कि लगातार घटते पे-आउट और बढ़ती महंगाई ने उनके परिवार का बजट बिगाड़ दिया है। पेट्रोल के बढ़ते दाम, बाइक की किस्त, सर्विस, इंश्योरेंस और रोजमर्रा के खर्च के बाद घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है। कई राइडर्स ने कहा कि दिनभर धूप, बारिश और ट्रैफिक में मेहनत करने के बावजूद इतनी आमदनी नहीं हो पाती कि परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें।राइडर्स ने यह भी आरोप लगाया कि कैंसिल ऑर्डर का नुकसान भी उन्हीं के हिस्से आता है। कई बार ऑर्डर उनकी गिनती में जोड़ दिया जाता है, लेकिन उसका उचित भुगतान नहीं मिलता। मल्टी-ऑर्डर सिस्टम और इंसेंटिव नीति को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई और कहा कि अधिक मेहनत के बावजूद कमाई लगातार घटती जा रही है।हड़ताल पर बैठे राइडर्स का कहना है कि वे कंपनी के विरोधी नहीं हैं, बल्कि केवल अपने हक की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलेगा तो परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा। उनका सवाल है कि जब गाड़ी उनकी, पेट्रोल उनका और पूरा जोखिम उनका है, तो उनकी मेहनत की कीमत एकतरफा तरीके से क्यों तय की जा रही है?राइडर्स ने मांग की कि कंपनी अपने पुराने वादे पूरे करे, पे-आउट में सुधार करे, दूरी के अनुसार उचित भुगतान सुनिश्चित करे, कैंसिल ऑर्डर और मल्टी-ऑर्डर नीति में पारदर्शिता लाए तथा इंसेंटिव व्यवस्था को भी बेहतर बनाए।