ट्रांसफार्मर में रिश्वत का करंट
12 हजार की कथित घूस लेते टीजी-2 और संविदा लाइनमैन रंगे हाथ गिरफ्तार
ट्रांसफार्मर के लिए किसान से मांगी कथित घूस, नोट हाथ में आते ही बिजलीघर में एंटी करप्शन का छापा,
खेत की बिजली लौटाने के बदले मांगे 12 हजार, रिश्वत की रकम ने दो बिजलीकर्मियों को पहुंचाया हवालात,
किसान की मजबूरी पर कथित वसूली का खेल पड़ा भारी, 12 हजार लेते टीजी 2 और लाइनमैन रंगे हाथ गिरफ्तार
जन माध्यम
बदायूं। खेत में फुंका ट्रांसफार्मर किसान के लिए सिर्फ बिजली का उपकरण नहीं, उसकी रोजी रोटी की सांस होता है। लेकिन जब उसी ट्रांसफार्मर को बदलवाने के लिए सरकारी व्यवस्था के दरवाजे पर दस्तक देने वाले किसान से कथित तौर पर 12 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जाए तो सवाल सिर्फ दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उस निजाम पर भी उठता है, जहां जरूरतमंद को राहत देने के बजाय कथित वसूली का रास्ता तलाशा जाता है।
जरीफनगर के 33/11 केवी बिजलीघर में गुरुवार को एंटी करप्शन की टीम की कार्रवाई ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। टीम ने टीजी 2 हरदेवा राम और संविदा लाइनमैन मानक चन्द्र को किसान से कथित तौर पर 12 हजार रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई के बाद बिजलीघर में अफरा-तफरी मच गई।
जरीफनगर थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर कुड़ई गांव निवासी सर्वेश कुमार के खेत में लगा ट्यूबवेल का ट्रांसफार्मर फुंक गया था। किसान ने उसे बदलवाने के लिए विभागीय कर्मचारियों से संपर्क किया। आरोप है कि बिल माफी के तहत दूसरा ट्रांसफार्मर लगवाने के एवज में उससे 12 हजार रुपये मांगे गए। खेत में खड़ी फसल और बिजली के इंतजार में परेशान किसान के सामने कथित रिश्वत की मांग ने उसकी मुश्किल और बढ़ा दी। आखिरकार उसने एंटी करप्शन संगठन का दरवाजा खटखटाया।
शिकायत मिलते ही एंटी करप्शन बरेली की टीम ने जाल बिछाया। प्रभारी निरीक्षक इश्तियाक वारसी के नेतृत्व में टीम ने गुरुवार दोपहर करीब 3:12 बजे कार्रवाई की। जैसे ही कथित रिश्वत की रकम दी गई, टीम ने दोनों आरोपियों को दबोच लिया। मौके से 12 हजार रुपये भी बरामद किए गए।
पकड़े गए टीजी 2 हरदेवा राम की उम्र 32 वर्ष बताई गई है, जबकि संविदा लाइनमैन मानक चन्द्र 28 वर्ष का है। दोनों जरीफनगर बिजलीघर में तैनात थे। गिरफ्तारी की खबर फैलते ही बिजलीघर में खलबली मच गई और विभागीय व्यवस्था पर तरह तरह के सवाल उठने लगे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस किसान को सरकारी व्यवस्था से राहत मिलनी चाहिए थी, अगर उसी से काम के बदले कथित रकम मांगी जाए तो आम आदमी आखिर किस दरवाजे पर जाए? बिजली विभाग के दफ्तरों में शिकायत, आवेदन और नियम कायदे की लंबी प्रक्रिया के बीच अगर नोट ही काम की रफ्तार तय करने लगें तो सरकारी सेवा और जनसेवा के बीच का फर्क मिट जाता है।
एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई ने कम से कम इतना जरूर साफ कर दिया है कि रिश्वतखोरी के खिलाफ निगरानी की आंखें खुली हैं। दोनों कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमे की कार्रवाई शुरू की गई है। अब जरूरत सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि यह भी देखने की है कि बिजली विभाग की व्यवस्था में कहीं और भी ‘रिश्वत का करंट तो नहीं दौड़ रहा।