भरोसे की रोशनी लेकर आए ज्ञानेंद्र सिंह

चीफ इंजीनियर ज्ञानेंद्र सिंह ने संभाली कमान, कहा हर शिकायत का फ़ौरन समाधान, हर उपभोक्ता का पूरा एहतराम

भरोसे की रोशनी लेकर आए ज्ञानेंद्र सिंह
HIGHLIGHTS:

• कॉल का जवाब, हर शिकायत का हिसाब

• जनता की आवाज़ अब नहीं होगी अनसुनी

• ख़िदमत, जवाबदेही और भरोसे की नई शुरुआत

• उपभोक्ता का सम्मान ही विभाग की पहचान

जन माध्यम 
झांसी।
किसी भी महकमे की पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि उसके अफसरों की नीयत, ज़िम्मेदारी और ख़िदमत के जज़्बे से होती है। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड डीवीवीएनएल को सोमवार को ऐसा ही नेतृत्व मिला, जब चीफ इंजीनियर वितरण ज्ञानेंद्र सिंह ने पदभार ग्रहण किया। कुर्सी संभालते ही उन्होंने ऐसा पैग़ाम दिया, जिसने विभागीय अधिकारियों के साथ साथ लाखों बिजली उपभोक्ताओं के दिलों में एक नई उम्मीद की शमा जला दी।
उन्होंने साफ़ लफ़्ज़ों में कहा कि हर मोबाइल कॉल केवल एक घंटी नहीं, बल्कि किसी परिवार की परेशानी, किसी किसान की मजबूरी, किसी व्यापारी की चिंता और किसी बच्चे की पढ़ाई से जुड़ी उम्मीद होती है। इसलिए कोई भी कॉल अनसुनी नहीं रहनी चाहिए। उनके इन अल्फ़ाज़ में केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि इंसानियत, एहसास और जनसेवा की सच्ची तासीर साफ़ झलकती दिखाई दी। पदभार ग्रहण करने के बाद आयोजित अपनी पहली समीक्षा बैठक में चीफ इंजीनियर ज्ञानेंद्र सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उपभोक्ता विभाग के लिए केवल एक उपभोक्ता संख्या नहीं, बल्कि भरोसे का वह चेहरा है जिसकी उम्मीदें बिजली विभाग से जुड़ी होती हैं। उन्होंने कहा कि हर शिकायत को गंभीरता से सुना जाए, हर नागरिक से तहज़ीब और शालीनता के साथ बातचीत की जाए तथा किसी भी समस्या को बेवजह लंबित रखना विभागीय जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि बिजली आज केवल रोशनी का नाम नहीं, बल्कि हर घर की रौनक, हर दुकान की रफ़्तार, हर खेत की हरियाली, हर अस्पताल की सांस और हर छात्र के सपनों का उजाला है। ऐसे में विभाग का हर कर्मचारी यह महसूस करे कि उसकी छोटी सी लापरवाही किसी परिवार की बड़ी परेशानी बन सकती है। इसलिए सेवा ही सबसे बड़ा धर्म और उपभोक्ता का सम्मान ही सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है।
मीडिया से बातचीत में ज्ञानेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि ट्रिपिंग जैसी समस्याओं को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए तकनीकी सुधारों के साथ साथ फील्ड स्तर पर सख़्त निगरानी की जाएगी। जहाँ भी कमियाँ मिलेंगी, वहाँ तत्काल कार्रवाई होगी और लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कार्यालयों में बैठकर केवल रिपोर्ट पढ़ना पर्याप्त नहीं है। असली तस्वीर फील्ड में दिखाई देती है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी नियमित निरीक्षण करे, उपकेंद्रों की स्थिति देखे, ट्रांसफार्मरों की निगरानी करे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी उपभोक्ता को अनावश्यक रूप से बिजली संकट का सामना न करना पड़े।
चीफ इंजीनियर ने यह भी कहा कि विभाग की सबसे बड़ी पूँजी उसके उपभोक्ताओं का एतमाद विश्वास है। यदि कोई नागरिक अपनी शिकायत लेकर विभाग तक पहुँचता है तो उसका सम्मानपूर्वक स्वागत होना चाहिए। उसे यह एहसास होना चाहिए कि विभाग उसकी परेशानी को अपनी परेशानी समझता है। यही सोच बिजली विभाग की नई कार्यसंस्कृति की बुनियाद बनेगी। बैठक में उन्होंने सभी लंबित परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक परियोजना तय समय सीमा के भीतर पूरी हो, इसकी व्यक्तिगत निगरानी वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। उन्होंने कहा कि बेहतर बिजली व्यवस्था केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ईमानदार मेहनत, सतत मॉनिटरिंग और जवाबदेह कार्यशैली से ही संभव है।
बैठक में अधीक्षण अभियंता शहर पुष्कर सिंह, अधीक्षण अभियंता ग्रामीण मोहम्मद अफरोज आलम, 33 केवी खंड के अधिशासी अभियंता विजेंद्र प्रताप सिंह सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने चीफ इंजीनियर के निर्देशों को पूरी निष्ठा और गंभीरता से लागू करने का भरोसा व्यक्त किया।
ज्ञानेंद्र सिंह का प्रशासनिक अनुभव और कार्य के प्रति समर्पण पहले भी चर्चा का विषय रहा है। बरेली में अधीक्षण अभियंता के रूप में उन्होंने उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देते हुए कई प्रभावी पहल की थीं। उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में रही है, जो फाइलों से अधिक ज़मीन …