गुरदासपुर: अंधेरे में डूबा ठक्कर संधू गांव, भड़के लोग
ठक्कर संधू गांव में बत्तियां न होने से पसरा अंधेरा। चोरी के डर में जी रहे ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा।
जिले के गांव ठक्कर संधू में बुनियादी सुविधाओं और स्ट्रीट लाइटों का भारी अभाव।
रात होते ही पूरे गांव में पसर जाता है अंधेरा, ग्रामीणों में लगातार बढ़ रहा चोरी का डर।
ग्रामीणों ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीसी गुरदासपुर को समाधान के लिए सौंपा पत्र।
सरकारी विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच धरातल पर अब तक नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई।
रविन्द्र सिंह / जन माध्यम
गुरदासपुर। पंजाब के सीमावर्ती जिले गुरदासपुर के अधीन आते गांव ठक्कर संधू के ग्रामीण इस आधुनिक दौर में भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। गांव में न तो पर्याप्त स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था है और न ही सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के बैठने के लिए बेंच उपलब्ध हैं। रात होते ही पूरा गांव पूरी तरह अंधेरे के आगोश में डूब जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों में असुरक्षा और भय का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में पर्याप्त रोशनी न होने की वजह से हाल के दिनों में चोरी की घटनाओं और संदिग्ध गतिविधियों की आशंका काफी ज्यादा बढ़ गई है। अंधेरे का अनुचित फायदा उठाकर असामाजिक तत्व रात के समय गांव में आसानी से घूमते दिखाई देते हैं। इस गंभीर स्थिति के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का रात के समय घरों से बाहर निकलना भी दूभर हो चुका है।
इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर एकजुट हुए गांववासियों ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा डीसी गुरदासपुर को एक लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द गांव की गलियों में स्ट्रीट लाइटें लगवाने और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की पुरजोर मांग की है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार की विकास योजनाओं के बड़े-बड़े दावों के बावजूद ठक्कर संधू गांव आज भी मुख्यधारा से कोसों दूर खड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि अक्सर शिकायतों के बाद केवल जांच का खोखला आश्वासन ही मिलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं होता। अब देखना यह होगा कि प्रशासन ग्रामीणों को इस अंधेरे से मुक्ति दिलाता है या यह जन-सरोकार का मुद्दा फाइलों में दबा रहेगा।