पानी में डूबे बिजलीघर, कमिश्नर ने थामी कमान

शंभू कुमार का फरमान जनता को परेशानी हुई तो अफसर पर होगी कार्रवाई, जनता सर्वोपरि

पानी में डूबे बिजलीघर, कमिश्नर ने थामी कमान
बरेली कमिश्नर शंभू कुमार।
HIGHLIGHTS:

जलभराव में डूबे बिजलीघर, कमिश्नर ने कसी अफसरों की लगाम

बारिश के कहर के बीच शंभू कुमार का सख्त फरमान

बिजली संकट पर कमिश्नर सख्त, लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही

जन माध्यम
बरेली। आसमान से बरसी बारिश ने जब शहर और देहात की बिजली व्यवस्था के सामने मुश्किलों का पहाड़ खड़ा कर दिया और जलभराव ने कई बिजलीघरों की सांसें थाम दीं, तब कमिश्नर शंभू कुमार ने हालात का जायजा लेते हुए खुद कमान संभाल ली। जनता बारिश और बिजली कटौती की दोहरी मार से जूझती रही तो कमिश्नर ने अफसरों को साफ संदेश दिया व्यवस्था जनता के लिए है और जनता को परेशानी हुई तो जिम्मेदारी तय होगी।

सोमवार को कमिश्नर ने विद्युत आपूर्ति से जुड़े अधिकारियों से स्थिति की जानकारी लेते हुए जलभराव वाले बिजलीघरों को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने चीफ इंजीनियर एके सिंह को निर्देश दिए कि जिन बिजलीघरों में बारिश का पानी भर गया है, वहां समस्या का तत्काल और प्रभावी समाधान कराया जाए। किसी भी इलाके में बिजली आपूर्ति अनावश्यक रूप से लंबे समय तक बाधित न हो और राहत एवं बहाली के काम में जरा भी सुस्ती दिखाई न दे।

कमिश्नर का जोर सिर्फ मौजूदा संकट को टालने पर नहीं, बल्कि उसकी स्थायी काट तलाशने पर है। उन्होंने ऐसे बिजलीघरों को चिह्नित कराने की पहल की है, जो निचले स्थान पर होने के कारण हर बरसात में जलभराव की जद में आ जाते हैं। इन बिजलीघरों को ऊंचा कराने की दिशा में काम शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बारिश आते ही बिजलीघर पानी में डूबने और विद्युत आपूर्ति चरमराने का सिलसिला हमेशा के लिए खत्म किया जा सके।

दरअसल, बारिश ने एक बार फिर उस हकीकत को सामने ला दिया, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जाता रहा है। जलभराव के कारण बिजलीघरों पर संकट मंडराता है, आपूर्ति प्रभावित होती है और उसका सीधा असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ता है। घरों में अंधेरा, कारोबार में ठहराव और जरूरी सेवाओं पर असर इन परेशानियों का दर्द वही परिवार समझ सकता है, जो घंटों बिजली का इंतजार करता है।

ऐसे वक्त में कमिश्नर शंभू कुमार की सक्रियता ने प्रशासनिक संवेदनशीलता की तस्वीर पेश की है। वह लगातार मंडल के चारों जिलों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। बारिश, जलभराव और संभावित बाढ़ की स्थिति को लेकर अधिकारियों से लगातार फीडबैक लिया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी के साथ जरूरत के मुताबिक तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं।

शंभू कुमार ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जनता की शिकायत को महज एक कागज या फाइल न समझा जाए। फरियाद करने वाला व्यक्ति सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए मजबूर न हो, उसकी समस्या सुनी जाए और उसका समाधान तय समय में कराया जाए। उन्होंने साफ कहा है कि यदि किसी व्यक्ति की शिकायत संबंधित स्तर पर नहीं सुनी जाती है तो वह सीधे कमिश्नर  के समक्ष अपनी बात रख सकता है।

कमिश्नर के पदभार संभालने के बाद से ही मंडल के जिलों में उनकी कार्यशैली चर्चा में है। लगातार दौरे, स्थलीय निरीक्षण, अधिकारियों से सीधा संवाद और व्यवस्थाओं की जमीनी पड़ताल ने प्रशासनिक अमले को भी सक्रिय किया है। उनकी कार्यशैली का संदेश बिल्कुल साफ है फाइलों में दर्ज प्रगति नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाला काम चाहिए।

बारिश ने जहां बिजली व्यवस्था की कमियां उजागर कीं, वहीं कमिश्नर की सख्ती ने जिम्मेदार अफसरों को भी आईना दिखा दिया है। जनता को राहत देना महज सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही है। शंभू कुमार इसी जवाबदेही को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाते नजर आ रहे हैं।

सबसे अहम बात यह है कि उन्होंने समस्या के तत्काल उपचार के साथ भविष्य की परेशानी का रास्ता भी तलाशना शुरू किया है। बिजलीघरों को ऊंचा कराने की पहल इसी सोच का हिस्सा है। यदि यह कवायद जमीन पर मुकम्मल हुई तो हर बरसात में जलभराव, बिजली संकट और बेबसी का जो सिलसिला सामने आता है, वह धीरे धीरे अतीत की बात बन सकता है।

बारिश के बीच कमिश्नर का यह रुख आम लोगों के लिए भरोसे की एक किरण है मुश्किल चाहे कितनी भी बड़ी हो, प्रशासन अगर संवेदनशील होकर जनता के साथ खड़ा हो जाए तो राहत की राह जरूर निकलती है।