बरेली: किसानों की जमीन हड़पने का आरोप, भाकियू (अ) ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की दी चेतावनी
बरेली में केसर इंटरप्राइजेज लिमिटेड बहेड़ी पर किसानों की जमीन धोखाधड़ी से दर्ज कराने का आरोप। भारतीय किसान यूनियन (अ) ने कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर कोर्ट अवमानना और अवैध नीलामी का मुद्दा उठाया।
राजस्व हेरफेर का आरोप: बहेड़ी में 35 साल के लिए पट्टे पर ली गई किसानों की जमीन को कथित मिलीभगत से कंपनी के नाम दर्ज कराने का सनसनीखेज दावा।
अदालती आदेश की अवहेलना: इलाहाबाद हाईकोर्ट में अब्दुल मलिक बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (वाद संख्या 124/2026) का मामला लंबित होने के बावजूद कराई गई नीलामी।
नियमों के खिलाफ बोली: सरकारी नियमों को ताक पर रखकर नीलामी की 25 फीसदी अग्रिम राशि नकद के बजाय चेक से जमा कराने का आरोप।
रविन्द्र सिंह/जन माध्यम
बरेली। अन्नदाताओं की जमीन से जुड़े एक बेहद संगीन और पेचीदा विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में प्रशासनिक और राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। भारतीय किसान यूनियन (अ) ने किसानों के साथ हुए कथित जमीन धोखेधड़ी मामले में मोर्चा खोल दिया है। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव शोएब इजहार और मंडल अध्यक्ष ठाकुर श्यामवीर सिंह चौहान की संयुक्त अगुवाई में दर्जनों किसानों ने कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर एक शिकायती ज्ञापन सौंपा। किसानों का सीधा आरोप है कि तहसील प्रशासन के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड में भारी हेरफेर किया गया है।
अनुबंध किराए का था, रिकॉर्ड में बदल गया मालिकाना हक
भाकियू (अ) द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, पूरा विवाद बहेड़ी क्षेत्र से जुड़ा है। आरोप है कि केसर इंटरप्राइजेज लिमिटेड, बहेड़ी ने करीब 35 वर्षों के लिए किसानों की कृषि भूमि को बाकायदा किराए (लीज) पर लिया था। अनुबंध की अवधि खत्म होने या उसके बीच ही, स्थानीय तहसील अधिकारियों के साथ कथित सांठगांठ कर राजस्व अभिलेखों (खतौनी) से मूल भूस्वामियों यानी किसानों के नाम चुपचाप गायब करवा दिए गए और उस पर कंपनी का नाम दर्ज करा लिया गया। किसान जब अपनी ही जमीन से बेदखल होने लगे, तब जाकर इस बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ।
हाईकोर्ट में मामला लंबित, फिर भी करा दी गई नीलामी
किसान नेताओं ने कानूनी तथ्यों को सामने रखते हुए बताया कि यह विवादित भूमि प्रकरण इस समय देश की बड़ी अदालत यानी इलाहाबाद हाईकोर्ट में अब्दुल मलिक बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (वाद संख्या 124/2026) के रूप में विचाराधीन है। संगठन का तर्क है कि जब देश की उच्च अदालत में मामले की सुनवाई चल रही है, तो स्थानीय प्रशासन द्वारा आनन-फानन में इस भूमि की नीलामी कराना सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है।
इतना ही नहीं, संगठन ने हाल ही में हुई नीलामी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल दागे हैं। उनका कहना है कि सरकारी राजस्व नियमों और विभिन्न अदालती नजीरों के मुताबिक, किसी भी सरकारी बोली या नीलामी की 25 प्रतिशत अग्रिम धनराशि मौके पर ही नकद जमा कराई जानी अनिवार्य है। इसके उलट, इस खास मामले में चहेतों को लाभ देने के लिए यह राशि चेक के माध्यम से स्वीकार की गई, जो पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाती है।
अल्टीमेटम: 14 जून तक कार्रवाई नहीं तो ठप होगा काम
तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कमिश्नर कार्यालय के मुख्य द्वार पर भारी संख्या में किसान और संगठन के आला पदाधिकारी एकत्र हैं। सफेद टोपी पहने और संगठन का एजेंडा हाथ में लिए किसान नेता पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी मांगों का पत्र अधिकारियों को सौंप रहे हैं।
कमिश्नर को ज्ञापन देने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए शोएब इजहार और ठाकुर श्यामवीर सिंह चौहान ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने मांग की है कि जब तक हाईकोर्ट से मालिकाना हक का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक इस भूमि से जुड़ी नीलामी सहित हर प्रशासनिक कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 14 जून तक इस फर्जीवाड़े में शामिल दोषी अधिकारियों और भू-माफिया तत्वों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो 15 जून से जिले के किसान अनिश्चितकालीन आंदोलन और चक्काजाम के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।