परतापुर: कबाड़ के ढेर में लगी आग से धुएं के गुबार में डूबा अच्छरोंडा गांव, अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

परतापुर थाना क्षेत्र के अच्छरोंडा गांव के पास कबाड़ और फाइबर स्क्रैप में लगी भीषण आग से फैला प्रदूषण। सांस लेने में दिक्कत होने पर ग्रामीणों ने अवैध फैक्ट्रियों के बाहर धरना देकर की कार्रवाई की मांग।

परतापुर: कबाड़ के ढेर में लगी आग से धुएं के गुबार में डूबा अच्छरोंडा गांव, अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
परतापुर के अच्छरोंडा में प्रदूषण और अवैध फैक्ट्रियों के विरोध में धरने पर बैठे छात्र संघ अध्यक्ष विजय राणा और ग्रामीण
HIGHLIGHTS:

घंटों मची तबाही: शनिवार सुबह खाली प्लॉट में डंप फाइबर स्क्रैप और रुई में लगाई गई आग, विकराल लपटों से फैक्ट्रियों को भी हुआ खतरा।

सांसों पर संकट: जहरीले धुएं के गुबार से घिरे अच्छरोंडा गांव के लोग; दमकल की गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू।

फैक्ट्रियों की तालाबंदी की मांग: भूजल में केमिकल का गंदा पानी उतारने और अवैध रूप से कीटनाशक बनाने का गंभीर आरोप, आंदोलन की चेतावनी।

हशमे आलम/जन माध्यम

मेरठ। मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अच्छरोंडा-बहादरपुर रोड पर शनिवार को अवैध औद्योगिक इकाइयों की मनमानी और बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। क्षेत्र में बिल्डरों और कतिपय तत्वों की कथित मिलीभगत से रिहायशी इलाकों के पास अवैध रूप से संचालित हो रहीं फैक्ट्रियों के कचरे ने पूरे गांव को धुएं के टापू में तब्दील कर दिया। खाली प्लॉटों में कचरा और स्क्रैप डंप कर उसमें सरेआम आग लगाने की इस घटना ने सैकड़ों जिंदगियों को सीधे खतरे में डाल दिया है।

शनिवार सुबह कबाड़ के ढेर को किया आग के हवाले

मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह क्षेत्र के एक खाली पड़े बड़े भूखंड में डंप किए गए भारी मात्रा में फाइबर स्क्रैप और कबाड़ की रुई के ढेर में आग लगा दी गई। देखते ही देखते इस आग ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि आसपास की अन्य फैक्ट्रियों की इमारतें भी इसकी जद में आने लगीं।

ग्रामीणों ने सीधे तौर पर जेके फाइबर इंडस्टरीज के मालिक गौरव गर्ग व अभी गर्ग और अपराजिता स्पिनिंग मिल कंपनी के मालिक नीरज मित्तल पर इस लापरवाही का आरोप मढ़ा है। आग के कारण वातावरण में फैले अत्यधिक जहरीले धुएं से पास ही स्थित अच्छरोंडा गांव पूरी तरह घिर गया, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचित किया, जिसके बाद दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर घंटों की मशक्कत के बाद इस भीषण आग पर काबू पाया।

जहर उगलती फैक्ट्रियों के खिलाफ आस्ताने पर धरना

सांसों पर आए इस संकट से भड़के ग्रामीण और युवा सीधे अपराजिता स्पिनिंग मिल के मुख्य गेट के बाहर एकत्रित हो गए और वहीं जमीन पर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने भारत केमिकल इंडस्टरीज, अपराजिता स्पिनिंग मिल और जेके फाइबर इंडस्टरीज जैसी कंपनियों के मालिकों के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई।

तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि छात्र नेता और ग्रामीण किस तरह सड़क पर दरी बिछाकर शांतिपूर्ण लेकिन बेहद आक्रामक अंदाज में इस औद्योगिक तानाशाही के खिलाफ लामबंद हैं।

गांव में बढ़ रहे कैंसर के मरीज, पानी भी हुआ जहरीला

धरने पर बैठे लोगों ने क्षेत्र की फैक्ट्रियों पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि जब से इस ग्रामीण अंचल के इर्द-गिर्द इन फैक्ट्रियों का जाल बिछा है, तब से गांव में कैंसर जैसे घातक रोगों के पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। भारत केमिकल इंडस्टरीज सहित कई इकाइयों पर आरोप है कि वे बिना सुरक्षा मानकों के अवैध रूप से कीटनाशक सल्फर व अन्य खतरनाक केमिकल का निर्माण कर रही हैं। साथ ही, फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषित और केमिकल युक्त गंदे पानी को सीधे बोरिंग के जरिए जमीन के अंदर (भूजल में) उतारा जा रहा है। इससे पूरे क्षेत्र का पेयजल दूषित हो चुका है और लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

बड़े आंदोलन की चेतावनी

घंटों चले इस उग्र धरना प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से सभी फैक्ट्री मालिकों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि यदि किसी भी फैक्ट्री द्वारा भविष्य में पर्यावरण और पानी को खराब करने की भूमिका सामने आई, तो ग्रामीण सीधे तौर पर उस फैक्ट्री के संचालन को ठप करा देंगे। हंगामा और विरोध दर्ज करा रहे प्रमुख लोगों में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष विजय राणा, मनीष राणा, सचिन चौधरी, मोती चौधरी, सोनू, रोहित और राजन सहित भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।