अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका बरेली का नाम

बरेली के सैंथल निवासी और स्वतंत्रता सेनानी नवाब सैयद गालिब अली के वंशज मीर सैयद उर्फी रज़ा जैदी को इंडोनेशिया के शाही खानदान ने 7वें नंतारा कल्चरल हेरिटेज फेस्टिवल में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका बरेली का नाम
रज़ा जैदी का पोर्ट्रेट
HIGHLIGHTS:

शाही खानदान से बुलावा: सैंथल के नवाब सैयद गालिब अली की 5वीं पीढ़ी के वंशज मीर सैयद उर्फी रज़ा जैदी इंडोनेशिया के 7वें नंतारा कल्चरल हेरिटेज फेस्टिवल (FABN VII) में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.

गंगा-जमुनी तहजीब के संवाहक: जैदी परिवार ने जहां मस्जिद-इमामबाड़े बनवाए, वहीं शहीदों की याद में ऐतिहासिक मोहन मंदिर भी बनवाया, जिसके जीर्णोद्धार के लिए पर्यटन विभाग ने ₹12 लाख मंजूर किए हैं.

वैश्विक मंच पर मौजूदगी: 23 से 27 जुलाई तक सलातिगा (इंडोनेशिया) में होने वाले इस समागम में यूरोप, एशिया, अमेरिका और अफ्रीका के कई शाही घराने शिरकत करेंगे.शाही खानदान से बुलावा: सैंथल के नवाब सैयद गालिब अली की 5वीं पीढ़ी के वंशज मीर सैयद उर्फी रज़ा जैदी इंडोनेशिया के 7वें नंतारा कल्चरल हेरिटेज फेस्टिवल (FABN VII) में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.

गंगा-जमुनी तहजीब के संवाहक: जैदी परिवार ने जहां मस्जिद-इमामबाड़े बनवाए, वहीं शहीदों की याद में ऐतिहासिक मोहन मंदिर भी बनवाया, जिसके जीर्णोद्धार के लिए पर्यटन विभाग ने ₹12 लाख मंजूर किए हैं.

वैश्विक मंच पर मौजूदगी: 23 से 27 जुलाई तक सलातिगा (इंडोनेशिया) में होने वाले इस समागम में यूरोप, एशिया, अमेरिका और अफ्रीका के कई शाही घराने शिरकत करेंगे.

सरफराज खान /जन माध्यम
सेंथल। बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद के ऐतिहासिक कस्बे सेंथल की गंगा-जमुनी सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास के नाम एक और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि जुड़ गई है। देश के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नवाब सैयद ग़ालिब अली के पांचवीं पीढ़ी के वंशज, हिज़ हाइनेस मीर सैयद उर्फी रज़ा ज़ैदी को इंडोनेशिया के सेंट्रल जावा स्थित मंगकुआलामन के सॉवरेन किंगडम (शाही साम्राज्य) की ओर से आयोजित होने वाले भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होने का ऐतिहासिक और औपचारिक न्योता मिला है।

यह प्रतिष्ठित आमंत्रण मिलने के बाद से क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों और साहित्यकारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

दुनिया भर के राजघरानों का सलातिगा में होगा महाकुंभ

इतिहास, कूटनीति और वैश्विक संस्कृतियों के इस अनूठे समागम के तहत आगामी 23 से 27 जुलाई तक इंडोनेशिया के सलातिगा शहर में 7वें 'नंतारा कल्चरल हेरिटेज फेस्टिवल' (FABN VII) का आयोजन किया जा रहा है। महामहिम श्री पादुका KGPAA मंगकु आलम द्वितीय की ओर से ग्रैंड चांसलर कर्नल एच.आर.एच. केपीपी. एम. लेचुमानन नोटोहामिजोयो ने यह आधिकारिक शाही निमंत्रण पत्र जारी किया है। इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में यूरोप, अमेरिका, एशिया और अफ्रीका महाद्वीप सहित दुनिया भर के शीर्ष और ऐतिहासिक शाही परिवारों के जुटने की उम्मीद है।

तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि चश्मा पहने और ग्रे रंग के फॉर्मल ब्लेज़र के साथ ब्लैक टर्टलनेक इनर पहने मीर सैयद उर्फी रज़ा ज़ैदी बेहद सौम्य और गरिमामय मुद्रा में कैमरे के सामने सीधे देख रहे हैं। उनके चेहरे की गंभीरता और यह व्यवस्थित पोर्ट्रेट उनकी ऐतिहासिक, राजनयिक और सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह परिलक्षित करता है।

सर्व धर्म समभाव और सादात-ए-बारह की अटूट विरासत

यह आमंत्रण मीर सैयद उर्फी रज़ा ज़ैदी के ऐतिहासिक परिवार की मजबूत पृष्ठभूमि और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने में उनके सतत योगदान को एक वैश्विक सम्मान है। सादात-ए-बारह से ताल्लुक रखने वाले इस ज़ैदी परिवार की जड़ें साहित्यिक रचनात्मकता और धर्मनिरपेक्षता (सर्व धर्म समभाव) के सिद्धांतों में बेहद गहरी हैं।

इस परिवार के पुरखों ने जहां एक ओर मस्जिदें, कर्बला, इमामबाड़े और कब्रिस्तान जैसी इस्लामी धार्मिक इमारतें तामीर कराईं, वहीं दूसरी ओर सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए ऐतिहासिक लाड़ खानी मंदिर और मोहन मंदिर जैसे हिंदू देवस्थानों का निर्माण करवाकर हिंदुस्तान की बुनियादी और साझा संस्कृति को सींचा था।

परदादा के बनवाए मोहन मंदिर के लिए मंजूर हुए ₹12 लाख

बरेली के ऐतिहासिक गजेटियर और ब्रिटिश औपनिवेशिक काल (कॉलोनियल-एरा) के आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, स्वतंत्रता संग्राम के समय सैंथल में स्थित 'मोहन मंदिर' का निर्माण मीर उर्फी रज़ा ज़ैदी के परदादा मीर मोहम्मद ज़फ़र साहब ने देश की आजादी के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों की पावन स्मृति में करवाया था। यह मंदिर सन 1878 ईस्वी के सरकारी रेवेन्यू सेटलमेंट रिकॉर्ड में भी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर के रूप में दर्ज है। मीर उर्फी रज़ा जैदी के व्यक्तिगत और भगीरथ प्रयासों के चलते ही उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग (Tourism Department) ने इस ऐतिहासिक मंदिर के पुनरुद्धार और सौंदर्गीकरण के लिए ₹12 लाख की धनराशि स्वीकृत की है।

रूस के शाही परिवार से भी मिल चुका है सम्मान

मीर सैयद उर्फी रज़ा ज़ैदी की वैश्विक और क्रॉस-कल्चरल पहचान पहले भी स्थापित हो चुकी है, जब रूस के शाही परिवार ने उन्हें विश्व शांति और सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण को बढ़ावा देने के उत्कृष्ट कार्यों के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया था।

इंडोनेशिया के पर्यटन, संस्कृति और शिक्षा मंत्रालय के सीधे सहयोग से आयोजित होने वाला यह नंतारा फेस्टिवल, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के तमाम शाही कुलों और सांस्कृतिक संरक्षकों को एक मंच प्रदान करेगा। इस वैश्विक पटल पर मीर उर्फी रज़ा ज़ैदी की उपस्थिति निश्चित रूप से महान नवाब ग़ालिब अली तातारी की गौरवमयी और ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर एक नया मुकाम देगी।