सामूहिक शादी में रौनक और रूहानियत
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में बरेली कॉलेज मैदान पर 372 हिंदू जोड़ों के फेरे, 97 मुस्लिम जोड़ों का निकाह, पूरा गृहस्थी सामान मिला।
➡️ 469 जोड़ों का भव्य सामूहिक विवाह
➡️ 372 हिंदू जोड़ों ने लिए सात फेरे
➡️ 97 मुस्लिम जोड़ों का निकाह, क़ुबूल है की गूंज
➡️ एक मंच पर हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
➡️ हर जोड़े को अलमारी, बर्तन, पायल समेत पूरा गृहस्थी सेट
➡️ बरेली कॉलेज मैदान रौनक-रूहानियत से महका
मंत्रोच्चार और क़ुबूल है की आवाज़ों के बीच 469 जोड़ो ने रचाया निकाह विवाह
जन माध्यम
बरेली। बरेली कॉलेज मैदान गुरुवार को एक ऐसी दिलकश फिज़ा का गवाह बना, जहाँ एक ओर वैदिक मंत्रों की पावन गूंज पूरे माहौल को आध्यात्मिक रंगों से भर रही थी, वहीं दूसरी ओर क़ुबूल है क़ुबूल है की सुकून देने वाली आवाज़ें एकता की खूबसूरत मिसाल पेश कर रही थीं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में 469 जोड़ो का निकाह और विवाह संपन्न हुआ, जिससे मैदान रौनक, रूहानियत और खुशियों से महक उठा।
कार्यक्रम का आगाज़ मुख्य विकास अधिकारी दिव्यानी ने गायत्री परिवार के संस्थापक की तस्वीर पर फूल अर्पित कर और दीप प्रज्ज्वलित करके किया। एमएलसी बहोरन लाल मौर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना समाज के गरीब और कमजोर तबके को इज़्ज़त के साथ शादी का अवसर देने वाली एक बेहतरीन और इंसानियत भरी पहल है, जिसका मक़सद सामाजिक सौहार्द और बराबरी को बढ़ावा देना है।
372 हिंदू जोड़ो ने मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लिए, जबकि 97 मुस्लिम जोड़ो का निकाह क़ाज़ी साहब ने दुआओं और दर्मियानी तकरीरों के बीच पढ़वाया। सारा इंतज़ाम इतना शानदार था कि हर जोड़ा सजी-धजी शक्ल में मंडप और निकाह स्थल तक गरिमा के साथ पहुंचा। विशाल पंडाल रंग बिरंगे कपड़ों, फूलों और लाइटों से यूं सजा था मानो एक मिनी दुल्हन नगरी खड़ी कर दी गई हो। 300 से अधिक यज्ञ वेदियों पर विद्वान आचार्यों के साथ चार चार जोड़ों के फेरे कराए गए। हर वेदी के पास कर्मचारियों की तैनाती थी ताकि किसी नवविवाहित को ज़रा भी असुविधा न हो। निकाह वाले हिस्से में दुआओं के साथ रूहानी सुकून का माहौल पूरे समारोह को एक अलग चमक दे रहा था।
सरकार की ओर से नवविवाहित जोड़ो को अलमारी, बर्तन सेट, डिनर सेट, चांदी की पायल-बिछिया, ट्रॉली बैग, वॉटर कूलर, फ़ैन, दीवार घड़ी, बिस्तर व अन्य गृहस्थी सामग्री भेंट की गई। साथ ही विवाह प्रमाणपत्र और योजना लाभ के स्वीकृति पत्र भी सौंपे गए।दिलचस्प मंज़र तब दिखा जब भोजीपुरा से आए एक नवविवाहित जोड़े के परिजन सामान लेने नहीं पहुंचे तो दूल्हा दुल्हन ने खुद ही हाथ में सामान उठाया और यज्ञ वेदी की ओर बढ़ गए। यह नज़ारा देखकर लोग मुस्कुरा उठे और माहौल में एक प्यारी मिठास घुल गई।उधर, बच्चों को भूख लगी तो परिजनों ने बाहर से पूड़ी-समोसे मंगाकर उन्हें खिलाया।
भूता, नवाबगंज, भोजीपुरा, बिथरी चैनपुर और क्यारा सहित कई क्षेत्रों के परिवार इस समारोह का हिस्सा बने।यह पूरा आयोजन हिंदू-मुस्लिम एकता, सामाजिक सौहार्द और सरकारी योजनाओं की सही नीयत का एक बेहतरीन और यादगार उदाहरण बनकर सामने आया।