सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश अवैध ध्वस्तीकरण पर एक सप्ताह का अंतरिम संरक्षण, हाई कोर्ट जाने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध ध्वस्तीकरण पर 10 दिसंबर तक अंतरिम संरक्षण दिया और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कहा।
➡️ सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 32 के तहत याचिका खारिज की
➡️ ध्वस्तीकरण पर 10 दिसंबर तक रोक लगाई गई
➡️ हाई कोर्ट को तात्कालिक सुनवाई के निर्देश
➡️ याचिकाकर्ता को एक सप्ताह का अंतरिम सुरक्षा कवच
➡️ स्टेटस–क्वो बनाए रखने का आदेश
➡️ मामले की अंतिम सुनवाई अब हाई कोर्ट में होगी
आर्टिकल 32 के तहत याचिका खारिज, आर्टिकल 226 के तहत राहत पाने का रास्ता खुला
सैय्यद शाहाबुद्दीन/ जन माध्यम
बरेली। अवैध निर्माण और ध्वस्तीकरण को लेकर दाखिल याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। वकील की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को सीधे राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने साफ कहा कि उचित मंच हाई कोर्ट है, जिसे संविधान के आर्टिकल 226 के तहत ऐसे मामलों पर अधिकार प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही यह अदालत मौलिक अधिकारों की रक्षा का सर्वोच्च मंच है, लेकिन हर प्रशासनिक कार्रवाई सीधे यहाँ चुनौती नहीं दी जा सकती। इसलिए अदालत ने याचिकाकर्ता को सलाह देते हुए कहा कि वह हाई कोर्ट में उचित याचिका दाखिल करे। अदालत ने हाई कोर्ट को यह भी अनुमति दी कि यदि याचिकाकर्ता अनुरोध करे, तो वह मामले को तात्कालिक सूची में दर्ज करे, क्योंकि ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पहले से शुरू हो चुकी है और याचिकाकर्ता के अनुसार कुछ हिस्सा पहले ही गिराया जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार,अदालत ने कहा कि आर्टिकल 32 के तहत दाखिल इस याचिका पर विचार करने का इरादा नहीं है। याचिकाकर्ता को आर्टिकल 226 के तहत हाई कोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी गई है। हाई कोर्ट की संबंधित बेंच के सामने मामले को तत्काल सूचीबद्ध कराने के लिए मेंशन करने की अनुमति दी गई।
ध्वस्तीकरण की स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर तक अंतरिम संरक्षण दिया है और सभी पक्षों को स्टेटस–क्वो बनाए रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह अंतरिम राहत केवल अस्थायी है और हाई कोर्ट मामले की मेरिट पर बिना किसी दबाव या प्रभाव के स्वतंत्र रूप से फैसला करेगा।आदेश के साथ ही रिट याचिका और लंबित सभी आवेदन निस्तारित कर दिए गए।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सीधा अर्थ यह है कि याचिकाकर्ता को अभी के लिए ध्वस्तीकरण से राहत तो मिली है, लेकिन अंतिम निर्णय हाई कोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगा। हाई कोर्ट यह देखेगा कि ध्वस्तीकरण प्रक्रिया के दौरान क्या कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं खासकर नोटिस, सुनवाई और वैध अनुमति जैसे पहलुओं को। कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया एक सप्ताह का सुरक्षा कवच याचिकाकर्ता के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि इससे उन्हें अपने दस्तावेज़ तैयार करने और हाई कोर्ट में प्रभावी सुनवाई का अवसर मिलेगा। वहीं, प्रशासनिक पक्ष भी इस दौरान कोई नई कार्रवाई नहीं कर सकेगा और सब कुछ कोर्ट की अगली दिशा के अनुसार आगे बढ़ेगा। इस आदेश के बाद अब पूरा मामला हाई कोर्ट की अदालत में तय होगा, जहाँ दोनों पक्ष अपने-अपने प्रमाण और दलीलें पेश करेंगे। सुप्रीम कोर्ट का यह संतुलित रुख न केवल कानून की प्रक्रिया को मजबूत करता है बल्कि न्यायिक व्यवस्था की पारदर्शिता को भी स्थापित करता है।