प्रोटीन संकट पर बड़ा संदेश
बरेली IVRI में 13वें मांस विज्ञान सम्मेलन: डॉ. संजय कुमार बोले – प्रोटीन की कमी दूर करने मांस उत्पादन 10.2 मिलियन टन से दोगुना करना जरूरी, AI-सेल आधारित मीट अपनाओ
➡️ IVRI इज्जतनगर: 13वें राष्ट्रीय मांस विज्ञान सम्मेलन का शुभारंभ
➡️ डॉ. संजय कुमार: भारत में प्रोटीन की भारी कमी, मांस उत्पादन अभी 10.25 मिलियन टन
➡️ अगले 10-15 साल में उत्पादन दोगुना करना जरूरी
➡️ स्मार्ट मीट सिस्टम: AI, कोशिका आधारित मांस, वैकल्पिक प्रोटीन अपनाओ
➡️ डॉ. त्रिवेणी दत्त: IVRI ने 100+ वैक्सीन, 4 बड़ी बीमारियां खत्म की
➡️ चुनौतियां: कम उत्पादकता, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, नई तकनीक जरूरी
➡️ 3 दिनी सम्मेलन में वैज्ञानिक-उद्यमी देंगे नई दिशा
आईवीआरआई सम्मेलन में वैज्ञानिक बोले मांस उत्पादन बढ़ाना होगा
जन माध्यम
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज़्ज़तनगर में गुरुवार को भारतीय मांस विज्ञान संगठन के 13वें राष्ट्रीय सम्मेलन एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ हुआ। देश के अनेक प्रमुख वैज्ञानिकों और पशु उद्योग विशेषज्ञों ने मांस क्षेत्र, प्रोटीन उपलब्धता और आधुनिक तकनीकों पर गहन चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य आने वाले वर्षों में भारत को विश्व स्तर पर प्रोटीन उत्पादन में अग्रणी बनाना है।संस्थान के निदेशक एवं कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि आईवीआरआई के 135 वर्षों के सफर में पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य हुए हैं। संस्थान ने 1889 से अब तक सैकड़ों शोध किए, 100 से अधिक टीके और निदान किट विकसित किए और देश में 4 बड़ी बीमारियों के उन्मूलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। संस्थान 14 देसी नस्लों के जर्मप्लाज्म का संरक्षण कर रहा है तथा हाल ही में दो नई मान्यता प्राप्त नस्लों का विकास भी किया गया है। उन्होंने कहा कि आईवीआरआई, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोग निदान, उपचार, वन्यजीव स्वास्थ्य और जैविक उत्पादों के उत्पादन में अग्रणी संस्थान है।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तथा कृषि वैज्ञानिक चयन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने कहा कि भारत में प्रोटीन की कमी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि भारत का वार्षिक मांस उत्पादन 10.25 मिलियन टन है, परन्तु प्रति व्यक्ति उपलब्ध पशु प्रोटीन अभी भी अनुशंसित स्तर से कम है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को प्रोटीन संकट से उबारना है तो मांस उत्पादन को तेज़ी से बढ़ाना होगा।
डॉ. संजय ने कहा कि आने वाले वर्षों में स्मार्ट मांस तंत्र स्रोत प्रमाणन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रसंस्करण, कोशिका–आधारित मांस और वैकल्पिक प्रोटीन अनिवार्य रूप से अपनाने होंगे।
10–15 वर्ष में उत्पादन दोगुना आवश्यक विशेषज्ञ भारतीय मांस विज्ञान संगठन के अध्यक्ष डॉ. पी.के. मंडल ने कहा कि पोषण की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए भारत को आगामी 10–15 वर्षों में अपने वर्तमान उत्पादन 10.2 मिलियन टन को दोगुना करना होगा। विशेषज्ञ डॉ. मेंदिरत्ता ने कहा कि भारत के मांस क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियाँ उत्पादकता में कमी, वहनीयता, आधारभूत ढाँचे की कमी और सीमित तकनीकी हस्तक्षेप अब बड़े सुधार की मांग करती हैं। उन्होंने कहा कि नवाचार, स्टार्टअप, नई तकनीक और बेहतर प्रसंस्करण व्यवस्था को प्राथमिकता देनी होगी।तीन दिवसीय संगोष्ठी में वैज्ञानिकों, उद्यमियों और उद्योग विशेषज्ञों की भागीदारी से मांस क्षेत्र के विकास की दिशा में कई उपयोगी सुझाव सामने आने की उम्मीद है। सम्मेलन का उद्देश्य भारत को वैश्विक प्रोटीन क्रांति में अग्रणी बनाना है।