ठंड में दरी पर परीक्षा
कड़कड़ाती ठंड में परिषदीय स्कूलों के बच्चे फर्नीचर बिना दरी पर बैठकर अर्द्धवार्षिक परीक्षा देते दिखे, जिससे शिक्षा विभाग की तैयारियाँ कटघरे में हैं।
➡️ ठंड में परिषदीय स्कूलों के बच्चे दरी पर परीक्षा देने को मजबूर
➡️ फर्नीचर न मिलने से बच्चों की पढ़ाई व परीक्षा दोनों प्रभावित
➡️ विभाग ने कई बार संख्या मंगाई, पर फर्नीचर नहीं मिला
➡️ बदलती परीक्षा तिथियों ने अव्यवस्था बढ़ाई
➡️ तस्वीरों ने शिक्षा विभाग की तैयारियों पर उठाए सवाल
फर्नीचर के बिना ठिठुरते मासूम बच्चे बेसिक शिक्षा विभाग की तैयारियाँ कटघरे में
डेस्क/ जन माध्यम
बरेली। दिसंबर की कड़कड़ाती ठंड में जहां शहर गर्म कपड़ों की तलाश में सिमट रहा था, वहीं परिषदीय विद्यालयों के मासूम बच्चे दरी पर बैठकर अपनी अर्द्धवार्षिक परीक्षा देने को मजबूर थे। बुधवार से शुरू हुई कक्षा 1 से 8 तक की परीक्षाओं का दूसरा दिन गुरुवार को भी बच्चों ने ठिठुरते हुए दरी पर बैठकर ही प्रश्नपत्र हल किए। शिक्षा प्रणाली की यह तस्वीर दिल को चीर देने वाली है। शैक्षिक सत्र 25–26 की अर्द्धवार्षिक परीक्षा को लेकर बेसिक शिक्षा निदेशक के पत्र के आधार पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने परीक्षा कार्यक्रम तैयार कर दिया था। प्रश्नपत्र भी पहले ही ब्लॉक संसाधन केन्द्रों को भेजे जा चुके थे, क्योंकि परीक्षाएं नवंबर के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित थीं। लेकिन एसआईआर कार्य के कारण परीक्षा तिथियां बदल दी गईं और अब परीक्षाएं 10 से 15 दिसंबर तक आयोजित की जा रही हैं। बुधवार को कक्षा 1 से 5 के विद्यार्थियों की मौखिक परीक्षाएं हुईं।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि पिछले कई वर्षों से विभाग द्वारा बार बार छात्र-छात्राओं की संख्या मांगी जाती है, ताकि उसी आधार पर फर्नीचर उपलब्ध कराया जा सके। लेकिन अब तक किसी भी विद्यालय को आवश्यक फर्नीचर नहीं दिया गया। मजबूरी ऐसी कि न पढ़ाई के दौरान बच्चों के पास कुर्सी मेज है,न परीक्षा के दौरान। इस ठंड में भी छोटे बच्चे दरी पर बैठकर ही अपनी शिक्षा और भविष्य की नींव बनाने को मजबूर हैं। आज परीक्षा के कारण सभी बच्चे स्कूल पहुंचे, लेकिन हालात देखकर बड़ा सवाल उठता है,क्या विभाग सिर्फ आंकड़ों में शिक्षा सुधार रहा है, या वाकई बच्चों की तकलीफ समझने की कोशिश भी करेगा? बच्चों की ठिठुरन, इंतज़ार और उनकी मजबूरी शिक्षा विभाग की कड़वी सच्चाई बयां कर रही है।