डीएम कार्यालय के बाहर परिवार संग आत्मदाह का प्रयास, सतर्क सुरक्षा कर्मियों ने टाला बड़ा हादसा

बरेली कलेक्ट्रेट परिसर में एक व्यक्ति ने पत्नी और बेटी के साथ कथित रूप से आत्मदाह का प्रयास किया। मौके पर मौजूद एलआईयू, इंटेलिजेंस और होमगार्ड कर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया।

डीएम कार्यालय के बाहर परिवार संग आत्मदाह का प्रयास, सतर्क सुरक्षा कर्मियों ने टाला बड़ा हादसा
HIGHLIGHTS:

• डीएम कार्यालय के बाहर व्यक्ति ने पत्नी और बेटी के साथ कथित आत्मदाह का प्रयास किया।

• एलआईयू, इंटेलिजेंस और होमगार्ड कर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टला।

• मीरगंज में सरकारी रास्ते के विवाद को लेकर पीड़ित परिवार प्रशासन से न्याय की मांग कर रहा है।

जन माध्यम
बरेली।
जिला अधिकारी कार्यालय के बाहर गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक व्यक्ति अपनी पत्नी और नाबालिग बेटी के साथ कथित रूप से आत्मदाह करने पहुंच गया। मौके पर तैनात एलआईयू, इंटेलिजेंस और होमगार्ड के जवानों की सतर्कता से समय रहते पूरे परिवार को रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही व्यक्ति ने अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डालना शुरू किया, मौके पर मौजूद इंटेलिजेंस कर्मी ओमपाल सिंह, एलआईयू के अमित कुमार और होमगार्ड संदीप मिश्रा तुरंत उसकी ओर दौड़े और उसे काबू में लेकर आत्मदाह का प्रयास विफल कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो कलेक्ट्रेट परिसर में गंभीर घटना हो सकती थी।

जानकारी के अनुसार, मीरगंज थाना क्षेत्र के गांव खमरिया साहनी निवासी 47 वर्षीय लालसिंह गंगवार अपनी पत्नी राजरानी और आठ वर्षीय बेटी नंदनी के साथ जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचे थे। लालसिंह का आरोप है कि गांव में सरकारी खड़ंजा मार्ग को लेकर चल रहे विवाद में उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है, जिससे परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाने का प्रयास किया।

लालसिंह और सुंदरलाल का आरोप है कि गांव के चन्द्रपाल तथा रामप्रकाश ने सरकारी रास्ते पर वाहन, लकड़ी और पशु खड़े कर आवागमन बाधित कर रखा है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

प्रशासनिक जांच में राजस्व टीम ने मौके पर अस्थायी अतिक्रमण मिलने की बात कही है। वहीं, दूसरे पक्ष ने संबंधित भूमि को वर्ष 1959 के बैनामे से खरीदी गई निजी संपत्ति बताया है। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 1986 में क्षेत्र में चकबंदी हो चुकी है, इसलिए पुराने बैनामे की वर्तमान स्थिति की जांच की जा रही है।

राजस्व विभाग की एक अन्य जांच रिपोर्ट में विवादित भूमि को आबादी क्षेत्र का हिस्सा बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, राजस्व अभिलेखों के मानचित्र में वहां रास्ता दर्ज नहीं है तथा शिकायतकर्ता के लिए वैकल्पिक निकास उपलब्ध होने की बात भी कही गई है।

पुलिस और प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है। वहीं, सुरक्षा कर्मियों की तत्परता से कलेक्ट्रेट परिसर में संभावित बड़ा हादसा टल गया।