वृन्दावन अग्निकांड की गूंज राष्ट्रपति सचिवालय तक: मुख्य सचिव को कड़े एक्शन के निर्देश,
वृन्दावन के रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध होटलों और गेस्ट हाउसों में लगातार हो रहे अग्निकांड का मामला राष्ट्रपति भवन पहुंच गया है। सचिवालय ने यूपी के मुख्य सचिव को कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए हैं।
वृन्दावन के अवैध होटलों-गेस्टहाउसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और आए दिन होने वाले अग्निकांडों पर राष्ट्रपति सचिवालय ने लिया बड़ा संज्ञान।
मुख्य सचिव को निर्देश: राष्ट्रपति सचिवालय के अवर सचिव लक्ष्मी महाराबूषनम ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को मामले की जांच कर तुरंत कानूनी कार्रवाई करने के आदेश जारी किए।
अफसरों की ढीली चाल: रुक्मिणि विहार अग्निकांड में एमवीडीए (MVDA) के तीन अवर अभियंताओं (JE) से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बावजूद महीनों बाद भी जवाबदेही तय नहीं
श्याम बिहारी भार्गव/जन माध्यम,
मथुरा । धर्मनगरी वृन्दावन के रिहायशी इलाकों को व्यावसायिक लालच के दलदल में धकेलने वाले रसूखदारों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं है। रिहायशी क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए होटलों, गेस्टहाउसों और शोरूमों में लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं की गूंज अब देश के सर्वोच्च कार्यालय यानी राष्ट्रपति सचिवालय तक पहुंच गई है। स्थानीय स्तर पर हो रही लीपापोती से खफा सामाजिक कार्यकर्ताओं की लंबी लड़ाई के बाद राष्ट्रपति भवन ने इस गंभीर सुरक्षा चूक का संज्ञान लिया है।
वृन्दावन की सुरक्षा और रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से संचालित हो रहे कॉमर्शियल भवनों में लगातार भड़कती आग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद कृष्ण शुक्ला ने एक विस्तृत खोजी शिकायती पत्र राष्ट्रपति सचिवालय, केंद्र और राज्य सरकार को भेजा था।
मामले की गंभीरता और जनता की जान-माल के खतरे को देखते हुए राष्ट्रपति सचिवालय के अवर सचिव लक्ष्मी महाराबूषनम ने इस पर त्वरित ऐक्शन लिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को सीधे निर्देश जारी कर इस पूरे घालमेल पर सख्त और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। राष्ट्रपति भवन से मिले इस कड़े रुख के बाद उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
जैसा कि क्षेत्र में हुई हालिया आगजनी की इस खौफनाक तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है, रिहायशी इलाकों के बीचों-बीच से गुजरने वाले बिजली के तारों और अवैध निर्माणों के चलते आग की लपटें किस कदर तांडव मचाती हैं। यह तस्वीर बयां करती है कि वृन्दावन के रिहायशी इलाकों में रहने वाले स्थानीय नागरिक हर पल बारूद के ढेर पर बैठने को मजबूर हैं।
शिकायतकर्ता प्रहलाद कृष्ण शुक्ला ने 'जन माध्यम' को बताया कि कुछ महीने पहले रुक्मिणि विहार स्थित एक नामी होटल में भीषण अग्निकांड हुआ था। उस समय मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण ने जनता के आक्रोश को शांत करने के लिए तीन अवर अभियंताओं (JE) दिनेश कुमार, मनोज कुमार और अनिल सिंघल से स्पष्टीकरण तो मांगा, लेकिन मामला फाइलों में ही दबा दिया गया। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने अवैध गेस्ट हाउसों और होटलों को चिह्नित कर सीलिंग की कार्रवाई के लिए बकायदा कमेटियों का गठन किया था, लेकिन हकीकत यह है कि इन कमेटियों ने धरातल पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
इस पूरे मामले में अब खोजी कड़ियों को जोड़ते हुए भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंचने की मांग तेज हो गई है। महामहिम को भेजे गए शिकायती पत्र में मांग की गई है कि पूर्व समय में तैनात रहे एमवीडीए के इन तीनों अवर अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से बड़ी जांच के दायरे में लिया जाए। इनके कार्यकाल के दौरान वृन्दावन और आसपास के रिहायशी इलाकों में जितने भी कमर्शियल नक्शे पास किए गए या जिन अवैध निर्माणों को 'मौन स्वीकृति' दी गई, उन सभी की उच्च स्तरीय टेक्निकल टीम से स्क्रूटनी कराई जाए।
अब देखना यह होगा कि राष्ट्रपति सचिवालय के इस कड़े चाबुक के बाद उत्तर प्रदेश शासन और मथुरा विकास प्राधिकरण कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर किसी और बड़े हादसे का इंतजार करता है।