सहजनी विद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया मान
बहेड़ी के प्राथमिक विद्यालय सहजनी ने स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग 2025-26 में राष्ट्रीय स्तर पर 29वीं रैंक हासिल कर बरेली का गौरव बढ़ाया है।
• स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग 2025-26 में विद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर 29वीं रैंक मिली।
• विद्यालय को पहले भी राज्य स्तरीय स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार मिल चुके हैं।
• पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ने दिलाई राष्ट्रीय पहचान।
जन माध्यम
बरेली। विकास क्षेत्र बहेड़ी का प्राथमिक विद्यालय सहजनी एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली और नवाचारों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। केंद्र सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा संचालित ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (एसएचवीआर) 2025-26’ में विद्यालय को देशभर में 29वीं रैंक प्राप्त हुई है। इस उपलब्धि ने जनपद बरेली को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
विद्यालय की यह सफलता वर्षों से किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है। इससे पहले वर्ष 2016 और 2017 में भी विद्यालय को राज्य स्तरीय स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार मिल चुका है। वहीं अगस्त 2022 में विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजीव सिंह और ग्राम प्रधान रघुवीर सिंह पाल को उल्लेखनीय योगदान के लिए मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया था।
प्रधानाध्यापक राजीव सिंह के नेतृत्व में विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को विशेष प्राथमिकता दी गई। परिसर में सूखा एवं गीला कचरा प्रबंधन प्रणाली, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और अन्य पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाएं विकसित की गईं। इन प्रयासों ने विद्यालय को स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की श्रेणी में अलग पहचान दिलाई।
वर्ष 2018 में विद्यालय को अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक अवसर उपलब्ध हुए। विद्यालय में कार्यरत शिक्षक जितेंद्र सिंह और मिथुन राय भी नवाचारी शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

ऐसे समय में जब सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं, प्राथमिक विद्यालय सहजनी की यह उपलब्धि एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है। विद्यालय ने साबित किया है कि समर्पित नेतृत्व, नवाचार और सामुदायिक सहयोग के बल पर सरकारी स्कूल भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
यह उपलब्धि केवल एक विद्यालय की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जो शिक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बच्चों के समग्र विकास का आधार मानती है।