जनता की आवाज़ पर गिरी लापरवाहों पर गाज

फोन न उठाने वाले चार अवर अभियंताओं पर कार्रवाई, दो को परिनिंदा प्रविष्टि, दो को चेतावनी

जनता की आवाज़ पर गिरी लापरवाहों पर गाज
सांकेतिक चित्र
HIGHLIGHTS:

चीफ इंजीनियर के सख्त रुख से विभाग में बढ़ी जवाबदेही, उपभोक्ता हित सर्वोपरि

जन माध्यम 
बरेली।
सरकारी दफ्तरों की दुनिया में अक्सर शिकायतों की फाइलें धूल फांकती रह जाती हैं और फरियादी उम्मीदों का दामन थामे दर दर भटकता रहता है। मगर जब कोई विभाग जनता की आवाज़ को अपनी ज़िम्मेदारी समझकर कार्रवाई करता है, तो वह सिर्फ़ एक प्रशासनिक फैसला नहीं होता, बल्कि टूटते भरोसे को फिर से जोड़ने की कोशिश बन जाता है।
बिजली विभाग ने कुछ ऐसा ही किया है। जिन अवर अभियंताओं पर जनप्रतिनिधियों और आम उपभोक्ताओं के फोन न उठाने, समस्याओं के समाधान में लापरवाही बरतने और उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी करने के आरोप लगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर विभाग ने साफ कर दिया कि अब खामोशी नहीं, जवाबदेही बोलेगी।
बिजली की समस्या केवल एक तकनीकी खराबी नहीं होती। किसी घर में बुझा हुआ बल्ब एक बच्चे की पढ़ाई रोक देता है, किसी बीमार बुज़ुर्ग की बेचैनी बढ़ा देता है और किसी मेहनतकश परिवार की रातों की नींद छीन लेता है। ऐसे में जब मदद के लिए किया गया एक फोन अनसुना रह जाए, तो दर्द सिर्फ़ बिजली जाने का नहीं होता, बल्कि व्यवस्था से उम्मीद टूटने का होता है। 23 मई को सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में जब जनप्रतिनिधियों ने यह मुद्दा उठाया कि कुछ अधिकारी जनता और जनप्रतिनिधियों के फोन तक रिसीव नहीं करते, तो यह केवल शिकायत नहीं थी, बल्कि उन हजारों लोगों की बेआवाज़ पुकार थी जो अपने छोटे छोटे मसलों के समाधान के लिए विभाग की चौखट तक पहुंचते हैं। मुख्य अभियन्ता के निर्देशन और अधीक्षण अभियन्ता धर्मेंद्र सिंह की निगरानी में हुई कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि विभाग अब सिर्फ़ तारों और ट्रांसफार्मरों की देखभाल नहीं करेगा, बल्कि जनता के भरोसे की भी हिफाज़त करेगा। दो अवर अभियंताओं को परिनिंदा प्रविष्टि और दो को चेतावनी पत्र जारी कर यह स्पष्ट कर दिया गया कि सरकारी कुर्सी इख्तियार का नहीं, जवाबदेही का नाम है।
इस कार्रवाई की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसमें सत्ता का रौब नहीं, बल्कि सेवा का एहसास दिखाई देता है। यह कदम उन लोगों के लिए तसल्ली का पैग़ाम है जिनकी शिकायतें कभी अनसुनी रह जाती थीं। विभाग ने मानो यह कह दिया हो कि अगर कोई फरियादी मदद के लिए फोन करेगा, तो उसकी आवाज़ अब फाइलों के अंधेरे में गुम नहीं होगी।
बिजली विभाग की यह पहल केवल चार कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई की खबर नहीं है, बल्कि यह उस बदलती सोच का आईना है जिसमें जनता को उपभोक्ताbनहीं, बल्कि विश्वास माना जा रहा है। जब व्यवस्था अपनी कमियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने का साहस दिखाती है, तभी असली बदलाव जन्म लेता है। बिजली विभाग का यह कदम उन तमाम उपभोक्ताओं के दिल में एक नई उम्मीद जगा रहा है कि उनकी आवाज़ की अहमियत है, उनकी तकलीफों की कीमत है और उनकी फ़रियाद सुनने वाला कोई मौजूद है। आखिरकार, रोशनी सिर्फ़ बिजली से नहीं आती, बल्कि संवेदनशीलता, जवाबदेही और इंसानियत से भी पैदा होती है। यही रोशनी आज बरेली बिजली विभाग के इस फैसले में साफ़ दिखाई दे रही है।