बरेली जीआरपी को बड़ी कामयाबी: मौलाना तौसीफ रजा 'ब्लाइंड मर्डर केस' का खुलासा, 10 हजार का इनामी पंकज राजपूत प्लेटफॉर्म से गिरफ्तार
बरेली जंक्शन जीआरपी पुलिस ने सर्विलांस और पीएनआर ने डेटा की मदद से बिहार के मौलाना तौसीफ रजा हत्याकांड का सफल अनावरण किया है। दस हजार का इनामी शूटर पंकज राजपूत प्लेटफॉर्म नंबर 2 से दबोचा गया।
ब्लाइंड मर्डर का पर्दाफाश: बिहार निवासी मौलाना तौसीफ रजा की सनसनीखेज हत्या की गुत्थी को बरेली जंक्शन जीआरपी ने महज कुछ दिनों में सुलझाया।
पीएनआर और वीडियो क्लिप से सुराग: ट्रेन यात्रियों के PNR नंबरों की छानबीन और सफर के दौरान मिली वीडियो क्लिप से पुलिस को हाथ लगा मुख्य कातिल का सुराग।
दरगाह आलाहजरत के संगठन ने की तारीफ: लगातार पैरवी कर रहे संगठन 'जमात रजा ए मुस्तफा' और परिजनों ने त्वरित कार्रवाई पर बरेली GRP टीम की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
रविन्द्र सिंह/जन माध्यम
बरेली जंक्शन। उत्तर प्रदेश की राजकीय रेलवे पुलिस अनुभाग मुरादाबाद को एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। रेलवे पुलिस ने बेहद पेचीदा और चुनौतीपूर्ण माने जा रहे मौलाना तौसीफ रजा (निवासी किशनगंज, बिहार) के 'ब्लाइंड मर्डर केस' का सफल अनावरण कर दिया है। इस मामले में लगातार फरार चल रहे और जीआरपी मुरादाबाद के पुलिस अधीक्षक द्वारा घोषित 10,000 रुपये के इनामी शातिर अपराधी पंकज राजपूत को जीआरपी बरेली जंक्शन पुलिस टीम ने सर्विलांस की मदद से धर दबोचा है।
प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर गश्त के दौरान दबोचा गया हत्यारा
रेलवे पुलिस महानिदेशक श्री प्रकाश डी और पुलिस महानिरीक्षक रेलवे श्री आर के भारद्वाज के कुशल मार्गदर्शन में रेलवे स्टेशनों पर अपराधियों के विरुद्ध सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक रेलवे आशुतोष शुक्ला और उपाधीक्षक अनिल कुमार वर्मा के निर्देशन में जीआरपी बरेली जंक्शन के प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार वर्मा अपनी टीम के साथ प्लेटफॉर्मों पर गश्त कर रहे थे।
रविवार, 7 जून 2026 की रात करीब 8:30 बजे मुखबिर की सटीक सूचना और सर्विलांस टीम की ट्रेसिंग के आधार पर पुलिस टीम ने प्लेटफॉर्म नंबर 02 से एक संदिग्ध युवक को घेराबंदी करके दबोच लिया। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसकी शिनाख्त पंकज राजपूत (उम्र 25 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय कुंदन सिंह, निवासी मोहल्ला कानून गोयान, लालबाग, थाना मुगलपुरा, जनपद मुरादाबाद के रूप में हुई।
तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि पकड़े गए आरोपी पंकज राजपूत को जीआरपी के सुरक्षाकर्मियों ने चारों तरफ से सुरक्षा घेरे में ले रखा है और वह सिर झुकाए खड़ा है। मेज पर मुस्तैदी से बैठे प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार वर्मा मामले के कागजातों को अंतिम रूप दे रहे हैं। पृष्ठभूमि में जीआरपी बरेली जंक्शन थाने का क्षेत्राधिकार मानचित्र भी साफ दिखाई दे रहा है।
हाइटेक तफ्तीश: पीएनआर डेटा और यात्रियों के वीडियो क्लिप से मिला कातिल का सुराग
यह हत्याकांड पुलिस के लिए एक सिरे से अंधा (ब्लाइंड मर्डर) था, जिसमें हत्यारे का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। जीआरपी और सर्विलांस सेल की टीम ने इस केस को सुलझाने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया। घटना वाले दिन संबंधित ट्रेनों में यात्रा कर रहे यात्रियों के पीएनआर (PNR) नंबरों को खंगालकर उनसे गहन बातचीत की गई। इस बातचीत और यात्रियों के डिजिटल सहयोग से पुलिस को कुछ खास वीडियो क्लिप हाथ लगीं। इन वीडियो क्लिप्स का गहराई से विश्लेषण करने पर पंकज राजपूत का चेहरा साफ तौर पर वारदात को अंजाम देने में सामने आ गया, जिसके बाद उस पर 10 हजार का इनाम घोषित कर पुलिस उसकी तलाश में जुट गई थी।
आलाहजरत संगठन 'जमात रजा ए मुस्तफा' ने जताई खुशी, पुलिस की सराहना
मौलाना तौसीफ रजा की हत्या के बाद से ही आम जनमानस और मृतक के परिजनों में गहरा आक्रोश था। दरगाह आलाहजरत बरेली के प्रमुख सामाजिक संगठन 'जमात रजा ए मुस्तफा' द्वारा इस मामले में लगातार पुलिस अधिकारियों से मिलकर निष्पक्ष जांच और कातिल की गिरफ्तारी के लिए पैरवी की जा रही थी। जैसे ही जीआरपी ने हत्यारोपी को जेल भेजने की कार्रवाई की, इस संगठन समेत बरेली के तमाम समाजसेवी संगठनों ने जीआरपी पुलिस टीम की त्वरित और निष्पक्ष कार्यप्रणाली की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
इस जांबाज टीम को मिली सफलता
इस जटिल केस को सुलझाने वाली मुख्य टीम में प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार वर्मा, उपनिरीक्षक संजीव कुमार, उपनिरीक्षक अनुराग प्रताप सिंह और मुरादाबाद अनुभाग के सर्विलांस सेल प्रभारी उपनिरीक्षक सन्नी कुमार शामिल रहे। इसके साथ ही मुख्य आरक्षी शैलेंद्र कुमार, अक्षय कुमार, रामेन्द्र कुमार, मुख्तार आलम, मोहित शुक्ला और आरक्षी मनीष कुमार, संदीप कुमार तथा मोहम्मद आलम ने इस धरपकड़ अभियान में मुख्य और सराहनीय भूमिका निभाई। अभियुक्त के खिलाफ जीआरपी थाना बरेली जंक्शन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) (हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया है।