बरेली: तय समय से पहले खुल रहीं शराब की दुकानें, आबकारी बेखबर
बरेली के सिविल लाइंस सहित कई इलाकों में निर्धारित समय से पहले खुल रहीं शराब की दुकानें। आबकारी अधिकारी हुकुम सिंह का वही पुराना राग— जांच करेंगे।
बरेली के कई इलाकों में नियम-कायदों को ताक पर रखकर तय समय से पहले खोली जा रही हैं शराब की दुकानें।
तसवीर में सिविल लाइंस इलाके में सुबह 07:16 बजे ही दुकान से शराब की बिक्री का हुआ खुलासा।
आबकारी अधिकारी हुकुम सिंह का पुराना और घिसा-पिटा जवाब "मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई करेंगे।"
रविन्द्र सिंह, बरेली।
उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में आबकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिले के कई वीआईपी और रिहायशी इलाकों में शराब की दुकानें अपने निर्धारित सरकारी समय से काफी पहले ही खुल रही हैं। इस गंभीर लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है, लेकिन आबकारी विभाग इस पूरे मामले में मूकदर्शक बना बैठा है, जिससे उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सुबह 7:16 बजे ही खुल गई दुकान, सबूत आया सामने
यह कोई हवाई आरोप नहीं है, बल्कि जमीन पर इसकी पुख्ता हकीकत देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक जीपीएस मैप कैमरा स्क्रीनशॉट ने विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी है।

इस स्क्रीनशॉट के मुताबिक, बरेली के पॉश इलाके सिविल लाइंस (पिन कोड- 243001) में बुधवार, 3 जून 2026 को सुबह ठीक 07:16:47 बजे ही शराब की दुकान खोलकर वहां चोरी-छिपे बिक्री शुरू कर दी गई। जब सुबह-सुबह ही नियमों को ताक पर रखकर दुकानें खोली जा रही हैं, तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ठेकेदारों को विभागीय कार्रवाई का कोई डर नहीं है।
आबकारी अधिकारी हुकुम सिंह का वही घिसा-पिटा राग
जब इस गंभीर मामले और समय से पहले खुल रही दुकानों के पुख्ता प्रमाण को लेकर जिला आबकारी अधिकारी हुकुम सिंह से बातचीत की गई, तो उनका जवाब वही पुराना और घिसा-पिटा रहा "मामला संज्ञान में आया है, जांच कर कार्रवाई करेंगे।"
हैरानी की बात यह है कि हर बार जब भी किसी इलाके में ऐसी अनियमितता उजागर होती है या मीडिया द्वारा सच दिखाया जाता है, तो विभाग की ओर से यही रटा-रटाया जवाब थमा दिया जाता है। लेकिन इस कथित जांच का परिणाम क्या निकला और किस ठेकेदार पर क्या ऐक्शन हुआ, यह जानकारी शायद ही कभी जनता के सामने आ पाती है।
निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति, उठ रहे गंभीर सवाल
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि शराब की दुकानें निर्धारित समय से कई घंटे पहले खुल रही हैं, तो यह कोई बंद कमरे की गतिविधि नहीं है जिसे पकड़ा न जा सके। मुख्य सड़कों पर सुबह-सुबह ही शराबियों की आमद शुरू हो जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि:
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आबकारी निरीक्षकों द्वारा किए जाने वाले रूटीन दावों और निरीक्षणों का आखिर उद्देश्य क्या है?
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यदि नियमों का उल्लंघन लगातार और खुलेआम हो रहा है, तो जिम्मेदारों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
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क्या विभाग केवल कागजों पर ही नियमों का पालन करवा रहा है?
जानकारों का साफ मानना है कि केवल "जांच करेंगे" का आश्वासन देकर आबकारी विभाग अपनी जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकता। जब मीडिया और आम नागरिक लगातार साक्ष्यों के साथ शिकायतें उठा रहे हैं, तो विभाग को सार्वजनिक करना चाहिए कि अब तक कितने दोषी लाइसेंस धारकों पर कार्रवाई की गई है। फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि जमीन पर सख्त ऐक्शन कब दिखेगा, या फिर यह "जांच नीति" ही आबकारी विभाग का स्थायी चेहरा बनकर रह जाएगी?