डीएम के आदेशों की धज्जियां उड़ाते आबकारी अधिकारी!

शराब दुकानों की मनमानी पर नहीं लगी लगाम, समय से पहले बिक्री और ओवररेटिंग की शिकायतों पर विभाग की खामोशी

डीएम के आदेशों की धज्जियां उड़ाते आबकारी अधिकारी!
HIGHLIGHTS:

डीएम का हुक्म दरकिनार, आबकारी महकमा बना मूकदर्शक

आदेश कागजों में कैद, शराब दुकानदारों की मनमानी बेलगाम

डीएम ने दिए सख्त निर्देश, आबकारी अफसरों ने साधी चुप्पी

जन माध्यम /रविंद्र सिंह
बरेली। शराब की दुकानों के लिए तय नियम कायदे शायद कागजों पर जितने सख्त हैं, जमीन पर उतने ही बेअसर नजर आ रहे हैं। मणिनाथ और सुभाषनगर  के साथ साथ जिले के अन्य  क्षेत्रों में भी में निर्धारित समय से पहले शराब की बिक्री और तय कीमत से अधिक वसूली यानी ओवररेटिंग के आरोपों ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे ज्यादा हैरत इस बात पर है कि स्थानीय लोगों और पार्षद की शिकायत के बाद डीएम अविनाश सिंह ने खुद आबकारी अधिकारी को फोन कर समय से पहले और समय के बाद खुलने वाली दुकानों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शिकायतें थमती नजर नहीं आ रहीं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ शराब की दुकानों पर सुबह निर्धारित समय से पहले ही बिक्री शुरू हो जाती है। इतना ही नहीं, कुछ स्थानों पर शराब की बोतलों पर अंकित कीमत से अधिक रकम वसूलने की शिकायतें भी सामने आई हैं। अगर ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह महज दुकानदारों की मनमानी नहीं, बल्कि नियमों की निगरानी करने वाले तंत्र की नाकामी का भी गंभीर मामला होगा।
डीएम के निर्देश के बाद उम्मीद थी कि आबकारी विभाग हरकत में आएगा, दुकानों का औचक निरीक्षण होगा और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। मगर आरोप है कि हालात में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। इससे सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर विभागीय निगरानी किस स्तर पर हो रही है?
मामले में आबकारी अधिकारी से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने बयान देने से इनकार कर दिया। अधिकारी का मौन उस वक्त और भी सवाल पैदा करता है, जब सीधे डीएम के निर्देश के बावजूद दुकानों की कथित मनमानी को लेकर शिकायतें सामने आ रही हों।
सवाल सीधा है अगर डीएम का आदेश ही शराब दुकानदारों पर असर नहीं डाल पा रहा, तो फिर आबकारी विभाग की मौजूदगी का मतलब क्या है? क्या निरीक्षण केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित है? क्या नियमों की किताब सिर्फ आम जनता को दिखाने के लिए है? और यदि किसी दुकान पर ओवररेटिंग या तय समय से पहले बिक्री हो रही है तो कार्रवाई में आखिर इतनी खामोशी क्यों?
शराब की बिक्री से जुड़े नियम केवल राजस्व का मसला नहीं हैं। निर्धारित समय और मूल्य की पाबंदी व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखने के लिए है। ऐसे में शिकायतों की निष्पक्ष जांच और दोष मिलने पर कठोर कार्रवाई जरूरी है।
डीएम के निर्देश के बाद अब निगाह आबकारी विभाग पर है। जनता जवाब चाहती है और व्यवस्था को कार्रवाई। अगर आरोप गलत हैं तो जांच के जरिए सच सामने आए और अगर शिकायतें सही हैं तो जिम्मेदारों पर ऐसी कार्रवाई हो कि नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों को साफ संदेश मिले सरकारी आदेश से ऊपर किसी शराब दुकान की मनमानी नहीं हो सकती।