घमंडी अफसर पर गिरी तबादले की गाज
बिजली संकट पर लगातार खुलासों के बाद 11 केवी वर्टिकल के अधिशासी अभियंता का तबादला
लगातार खबरों और जनता के गुस्से के बाद बिजली विभाग में मचा हड़कंप
गर्मी में बेहाल उपभोक्ताओं की आवाज बनी जन माध्यम की मुहिम, आखिर हुआ एक्शन
फोन न उठाने और मनमानी के आरोपों के बीच अधिशासी अभियंता का हुआ तबादला
जन माध्यम
बरेली। झुलसाती गर्मी में जब पूरा शहर बिजली संकट से कराह रहा था, बच्चे रातभर पसीने में तड़प रहे थे, बुजुर्ग हाथों से पंखा झलने को मजबूर थे और मरीज अंधेरे कमरों में सांसों से जंग लड़ रहे थे, तब बिजली विभाग का एक जिम्मेदार अफसर अपनी मनमानी और अकड़ में डूबा हुआ था। जनता की चीखें दबती रहीं, फोन बजते रहे, शिकायतें होती रहीं, लेकिन 11 केवी वर्टिकल के अधिशासी अभियंता नितिन कुमार के कानों पर मानो जूं तक नहीं रेंगी।
मगर कहते हैं कि जब व्यवस्था सो जाती है, तब कलम जागती है। जन माध्यम ने लगातार बिजली विभाग की लापरवाही, अफसरशाही के अहंकार और जनता के साथ हो रहे अन्याय को प्रमुखता से उठाया। खबर दर खबर यह उजागर किया गया कि कैसे एक जिम्मेदार अधिकारी जनता की समस्याओं से मुंह मोड़कर सिर्फ कुर्सी का रौब दिखाने में व्यस्त है।
आरोप थे कि अधिशासी अभियंता न केवल आम लोगों के फोन उठाने से बचते थे, बल्कि विभागीय कर्मचारियों और अधीनस्थ अधिकारियों से भी अपमानजनक व्यवहार करते थे। बिजली कटौती से परेशान लोग घंटों शिकायत करते रहे, लेकिन विभाग के दरवाजे बंद और अफसर का रवैया पत्थर बना रहा।
जनता की घुटती आवाज़ जब जन माध्यम की सुर्खियां बनी, तब जाकर बिजली विभाग की नींद टूटी। आखिरकार प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी और नितिन कुमार को बरेली से हटाकर देवीपाटन क्षेत्र, गोंडा से संबद्ध कर दिया गया। आदेश में साफ निर्देश दिए गए कि बिना किसी देरी के तत्काल कार्यमुक्त किया जाए।
यह सिर्फ एक तबादला नहीं, बल्कि उस अहंकारी कार्यशैली पर चोट है जिसने जनता को गर्मी में तिल-तिल कर परेशान किया। शहर में लोग खुलकर कह रहे हैं कि अगर मीडिया लगातार सवाल न उठाता तो शायद यह मनमानी यूं ही चलती रहती।
जन माध्यम की यह मुहिम अब उन हजारों उपभोक्ताओं के लिए राहत की उम्मीद बनी है, जो लंबे समय से बिजली विभाग की संवेदनहीनता के शिकार थे। फिलहाल, इस तबादले को जनता अपनी आवाज़ की जीत मान रही है। लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे लोग जनता का दर्द नहीं समझते, तब कलम ही सबसे बड़ा हथियार बनती है।