खंभों पर होगी हुनर की परीक्षा
संविदा और विभागीय कर्मियों की दक्षता जांचने को विशेष अभियान, सुरक्षा मानकों पर कड़ी नजर
सेफ्टी किट, दक्षता और जवाबदेही की होगी पड़ताल, हर गतिविधि कैमरे में होगी कैद।
बिजली हादसों पर रोक को निगम सख्त, खंभों पर चढ़ने वालों की होगी लाइव परीक्षा।
रोशनी के रखवालों की सुरक्षा पर फोकस, अकुशल कर्मियों से काम लेने पर कसेगा शिकंजा।
जन माध्यम
बरेली। बिजली की चमक के पीछे अक्सर कुछ ऐसे चेहरे होते हैं, जिनकी मेहनत दिखाई नहीं देती, लेकिन जिनकी जान हर रोज़ खतरे की दहलीज़ पर खड़ी रहती है। तपती दोपहरी हो या बरसात की स्याह रात, जब शहर अंधेरे में डूबता है तो यही लाइनमैन और संविदाकर्मी अपनी जान हथेली पर रखकर रोशनी की लौ फिर से जला देते हैं। मगर अफसोस, कई बार यही रोशनी उनके अपने घरों की खुशियों को बुझा देती है।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक ऐसी हकीकत सामने आई जिसने महकमे को झकझोर कर रख दिया। पाया गया कि कुछ स्थानों पर सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज कर कार्य किया जा रहा है। कहीं बिना सेफ्टी किट के खंभों पर चढ़ा जा रहा है, तो कहीं प्रशिक्षित कर्मचारी की जगह अकुशल या निजी व्यक्ति को बिजली की लाइनों पर भेज दिया जाता है। यह सिर्फ नियमों की खिलाफवर्जी नहीं, बल्कि जिंदगी के साथ एक खतरनाक जुआ है। हर बिजली कर्मी के पीछे एक पूरा संसार बसता है। किसी बूढ़ी मां की दुआएं, किसी हमसफर की उम्मीदें और किसी मासूम बच्चे के सपने उससे जुड़े होते हैं। जब वह सुबह घर से निकलता है तो परिवार की आंखों में उसकी सलामती की दुआ होती है। ऐसे में एक छोटी सी लापरवाही किसी घर की रौनक को मातम में बदल सकती है, किसी आंगन की हंसी को हमेशा के लिए खामोश कर सकती है। शायद इसी दर्द को महसूस करते हुए निगम प्रशासन ने अब सुरक्षा को महज कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि एक अमानत की तरह लेने का फैसला किया है। मंगलवार को जिले के सभी 33/11 केवी उपकेंद्रों पर संविदा और विभागीय कर्मचारियों की कार्यदक्षता की परख होगी। यह सिर्फ एक टेस्ट नहीं होगा, बल्कि यह तय करेगा कि बिजली के खतरनाक मोर्चे पर कौन वास्तव में सक्षम है और कौन नहीं। इस दौरान कर्मचारियों के खंभे पर चढ़ने, कार्य करने और सुरक्षा मानकों के पालन की लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी। तस्वीरें ली जाएंगी और प्रत्येक कर्मचारी से लिखित घोषणा भी ली जाएगी कि वह संबंधित कार्य करने में सक्षम है या नहीं। यह व्यवस्था जवाबदेही और पारदर्शिता की नई मिसाल बन सकती है। बिजली विभाग की यह पहल सिर्फ विभागीय छवि बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि उन मेहनतकश हाथों की हिफाजत की कोशिश है जो हर रोज़ अंधेरों से लड़कर शहर को रोशन करते हैं। आखिर रोशनी सिर्फ तारों से नहीं आती, उसके पीछे किसी की मेहनत, किसी का पसीना और कई बार किसी की जान का जोखिम भी शामिल होता है। आज जरूरत इस बात की है कि सुरक्षा नियम फाइलों की धूल में दफन न रहें, बल्कि हर खंभे, हर तार और हर कर्मचारी के साथ मजबूती से खड़े दिखाई दें। क्योंकि एक संविदाकर्मी की जान केवल एक कर्मचारी की जान नहीं होती, वह किसी मां की दुनिया, किसी पत्नी का सहारा और किसी बच्चे का पूरा आसमान होती है। और किसी भी कीमत पर उस आसमान को टूटने नहीं दिया जा सकता।