इंडिया गठबंधन के हुजूम से मुसलमान गायब...' मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी का बड़ा बयान;

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने दिल्ली में हुई विपक्षी गठबंधन की बैठक पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

इंडिया गठबंधन के हुजूम से मुसलमान गायब...' मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी का बड़ा बयान;
मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी
HIGHLIGHTS:

दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई विपक्षी दलों की बैठक में किसी प्रमुख मुस्लिम पार्टी को आमंत्रित न करने पर जताई कड़ी आपत्ति।

मौलाना का दावा कि सांप्रदायिकता खत्म करने का दम भरने वाले नेताओं ने अपनी साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'सांप्रदायिक' शब्द का जिक्र तक नहीं किया।

राहुल गांधी को मशवरा देते हुए कहा कि यूपी विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे के वक्त सपा प्रमुख 'रंग' बदलते नजर आएंगे।

बरेली। दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में देश के प्रमुख विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक और इसके बाद सामने आए साझा एजेंडे को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने अपनी तीखी और सख्त राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है। मौलाना बरेलवी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि इंडिया गठबंधन के इस भारी हुजूम में देश का मुसलमान पूरी तरह गायब नजर आया।

"किसी भी काबिल-ए-जिक्र मुस्लिम पार्टी को नहीं दिया न्योता"

मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने बैठक के स्वरूप पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय बैठक में देश की किसी भी काबिल-ए-जिक्र मुस्लिम राजनीतिक पार्टी या नेतृत्व को दावत नहीं दी गई। उन्होंने गठबंधन की औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि जो दल और नेता देश से सांप्रदायिकता को जड़ से खत्म करने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, उन्होंने अपने मुख्य एजेंडे और आपस में हुई गुफ्तगू के दौरान 'सांप्रदायिक' जैसे बुनियादी शब्द का इस्तेमाल करने से भी परहेज किया। मौलाना के अनुसार, आज के नाजुक माहौल में देश को भाईचारे और एकता की सख्त जरूरत है, लेकिन गठबंधन इस पर गंभीर नहीं दिख रहा।

वीडियो साक्ष्य में साफ देखा जा सकता है कि ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी अपने कार्यालय या पुस्तकालय (लाइब्रेरी) में बैठे हैं, जहां उनके पीछे की अलमारियों में सैकड़ों धार्मिक और ऐतिहासिक पुस्तकें करीने से सजी हुई हैं। काले रंग की पारंपरिक टोपी और सफेद कुर्ता पहने मौलाना के सामने मेज पर किताबों और कानूनी दस्तावेजों का एक बड़ा पुलिंदा रखा हुआ है। वह कैमरे के सामने हाथ के इशारों से बेहद आक्रामक और तार्किक अंदाज में इंडिया गठबंधन और क्षेत्रीय दलों की नीतियों की खामियां गिना रहे हैं।

राहुल गांधी को अतीत की याद दिलाकर किया आगाह

समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच उत्तर प्रदेश में बने सियासी गठबंधन को लेकर मौलाना बरेलवी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से राहुल गांधी को अतीत के चुनावी समीकरणों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस नेतृत्व को याद दिलाना चाहता हूं कि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान अगर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने मुस्लिम बहुल सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े कर वोट बैंक न बांटे होते, तो कांग्रेस को इतना बड़ा राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना पड़ता। मौलाना ने दावा किया कि अखिलेश यादव की इसी रणनीति के कारण उन तीनों राज्यों में कांग्रेस हारी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हुकूमत बनी। राहुल गांधी को इस बात पर गहराई से विचार-विमर्श करना चाहिए कि संकट के समय अखिलेश यादव ने गठबंधन धर्म क्यों नहीं निभाया।

'सीटों के बंटवारे के वक्त रंग बदलेंगे अखिलेश'

भविष्य में होने वाले उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कांग्रेस और राहुल गांधी को एक स्पष्ट राजनीतिक मशवरा (सलाह) दिया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अखिलेश यादव राजनीतिक रूप से भरोसा करने लायक व्यक्ति बिल्कुल नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को मेरी बात तब समझ आएगी, जब चुनाव के ऐन वक्त पर उम्मीदवारों के नामों और सीटों की तक्सीम (बंटवारा) का समय करीब आएगा। उस दौरान सब देख लेंगे कि अखिलेश यादव किस तरह से अपना राजनीतिक रंग बदलते नजर आते हैं। मौलाना का यह बयान उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर नए समीकरणों और चर्चाओं को जन्म दे रहा है।