बरेली: प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 साल पूरे, जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को बांटे फल और दवाइयां

बरेली जिला महिला चिकित्सालय में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

बरेली: प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 साल पूरे, जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को बांटे फल और दवाइयां
डॉ. विश्राम सिंह और सीएमएस डॉ. टी. प्रसाद
HIGHLIGHTS:

सराहनीय 10 वर्ष: मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में शुरू हुए राष्ट्रीय अभियान के दशक पूरे होने पर मना उत्सव.

नि:शुल्क महा-जांच: जिला महिला अस्पताल पहुंचे दर्जनों गर्भवती महिलाओं का डॉक्टरों ने किया नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण और बांटी दवाइयां.

पोषण को बढ़ावा: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. विश्राम सिंह ने स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ महिलाओं को सेहतमंद रहने के लिए फल वितरित किए.

हसीन दानिश/जन माध्यम
बरेली। देश में गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने, सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने और मातृ-शिशु मृत्यु दर के ग्राफ को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए संचालित 'प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान' ने अपने सफलतम 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक दशक की पूर्णता के उपलक्ष्य में मंगलवार को बरेली के जिला महिला चिकित्सालय (डफरिन) में एक विशेष स्वास्थ्य एवं जागरूकता कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में आईं गर्भवती महिलाओं की व्यापक नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें आवश्यक दवाइयों के साथ-साथ ताजे फल व पोषण किट प्रदान किए गए।

साल 2016 में शुरू हुई थी स्वास्थ्य क्रांति: सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह

महिला अस्पताल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बरेली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा इस देशव्यापी जन-कल्याणकारी अभियान की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी। अभियान का मुख्य संकल्प यह है कि हर महीने की एक निश्चित तारीख (कतिपय ९ तारीख) को सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों  पर गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व गुणवत्तापूर्ण और मुफ्त चिकित्सीय परामर्श, अल्ट्रासाउंड, हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें तथा जरूरी दवाइयां एक ही छत के नीचे मिल सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस अनूठी पहल से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की निर्धन महिलाओं में सुरक्षित मातृत्व के प्रति चेतना जागी है।

तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जिला महिला चिकित्सालय के मुख्य वार्ड के भीतर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्राम सिंह स्वयं आगे बढ़कर बेड के पास खड़ी एक गर्भवती महिला को फलों की टोकरी और स्वास्थ्य किट भेंट कर रहे हैं। उनके ठीक बगल में चिकित्सालय की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. टी. प्रसाद और वरिष्ठ महिला डॉक्टर पूरी आत्मीयता से मुस्कुराते हुए महिला का हौसला बढ़ा रही हैं। पृष्ठभूमि में सरकारी अस्पताल की साफ-सुथरी व्यवस्था और ड्यूटी पर तैनात पैरामेडिकल स्टाफ व स्टाफ नर्सें भी इस मानवीय पहल का हिस्सा बनती दिख रही हैं।

चिकित्सकों ने दिए सुरक्षित गर्भावस्था और पोषण के टिप्स

समारोह के दौरान महिला रोग विशेषज्ञों (गायनेकोलॉजिस्ट) द्वारा अस्पताल में उपस्थित महिलाओं को गर्भकाल के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, संतुलित आहार-विहार, हरी सब्जियों व आयरन-कैल्शियम की गोलियों के नियमित सेवन के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया गया। डॉक्टरों ने उपस्थित महिलाओं और उनके साथ आए तीमारदारों से कहा कि गर्भावस्था में किसी भी प्रकार की शारीरिक असहजता होने पर खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल से संपर्क करें, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।

वरिष्ठ डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने बढ़ाया उत्साह

इस गौरवमयी आयोजन के अवसर पर जिला महिला चिकित्सालय की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक  डॉ. टी. प्रसाद के साथ जिले की जानी-मानी महिला चिकित्सक, मेट्रन और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी पूरी मुस्तैदी के साथ मुस्तैद रहे। सभी वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों ने अस्पताल आए लाभार्थियों से सीधा संवाद कर उन्हें समय पर डॉक्टर को दिखाने और संस्थागत प्रसव (अस्पताल में डिलीवरी) कराने के लिए प्रेरित किया। अंत में सीएमओ ने स्वास्थ्य विभाग की इस १० वर्षीय यात्रा को सफल बनाने के लिए अस्पताल के पूरे स्टाफ की निष्ठा की सराहना की।